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गूंज रहे घंटा-घड़ियाल, मइया के लगे जयकारे

Mon, 11 Apr 2016 12:12 AM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
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रायबरेली में रविवार काे देवी मां की पूजा अर्चना करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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चैत्र नवरात्र के चौथे दिन मंगलवार को कूष्मांडा की श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। घरों, मंदिरों और सिद्धपीठों में लोगाें ने पूजा-आराधना, ध्यान, मंत्र, जप किया गया। जिले भर के देवी मंदिरों के अलावा पूजा पंडालों में पूजन अर्चन की धूम मची है।
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पूरे दिन भक्ति गीतों के बजने से वातावरण भी भक्तिमय हो गया है। कहीं घंटा घड़ियाल तो कहीं मइया के जयकारों की गूंज है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों के देवी मंदिरों देवी मइया के जयकारे लग रहे हैं। मां दुर्गा की पूजा अर्चना की होड़ मची है।

तड़के से ही पुरुष, महिलाएं और बच्चे मंदिरों में पहुंचने लगते हैं। यह सिलसिला पूरे दिन चलता रहता है। शहर के मंसा देवी मंदिर, चंपा देवी मंदिर, मढ़ी देवी मंदिर, काली देवी मंदिर, मां अहोरवा भवानी मंदिर, संकठा देवी मंदिर, ज्वाला देवी मंदिर में पूजन अर्चन के लिए सुबह और शाम को काफी भीड़ उमड़ी।
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इस दौरान मंदिरों के आसपास मेले जैसा माहौल है। भीड़ अधिक होने पर यातायात भी बाधित हो जाता है। भोर होते ही मंदिरों में मइया के जयकारे गूंजने लगते हैं। महराजगंज प्रतिनिधि के अनुसार जसवंतरी देवी मंदिर समिति की ओर से दुर्गा मंदिर परिसर में सुबह शाम श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।

परशुराम की तपोस्थली कहलाने वाली मां मिढ़ुरिन देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की खूब भीड़ उमड़ रही है। यहां सुबह से ही लोगों का तांता लगा रहता है। नवरात्र में दूरदराज से लोग पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। इस दौरान लोग परिक्रमा तो कोई नंगे पैर ही मां के दरबार में दस्तक देने पहुंच रहा है।

डलमऊ प्रतिनिधि के अनुसार मुराईबाग कस्बे में मुराईबाग कस्बे में सहकारी संघ कार्यालय परिसर में नवदुर्गा जनकल्याण समिति, आदि शक्तिपीठ दुर्गा मंदिर मुराईबाग मकनपुर रोड, युवा जनकल्याण समिति आदर्श नगर में पूजा अर्चना का दौर चल रहा है। इस मौके पर विनय, राकेश, रामनिवास आदि मौजूद रहे।

सतांव ब्लाक क्षेत्र के भीतरगांव स्थित मां आनंदी देवी मंदिर का इतिहास भी काफी पुराना है। बाबर के भारत पर आक्रमण के समय मंदिर को ध्वस्त करा दिया गया था। प्रतिमा भी उस तालाब में फेंकवा दी गई थी, जो रायबरेली-उन्नाव की सीमाओं को जोड़ता है।

बाद में इस प्रतिमा को शंकर हजाम (नाई) ने तालाब से निकलवाया और मंदिर बनवाया। वर्तमान समय में भी इस मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी नाई परिवार के लोग ही करते हैं। पूजा भी वही कराते हैं।
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