रायबरेली। डलमऊ पंप कैनाल के जर्जर ढांचे को एक बार फिर से तैयार करने के लिए भले ही 30 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए गए हैं, लेकिन किसान पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। मौजूदा समय सात पंप चलाने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद नहरों में भरपूर पानी नहीं पहुंच रहा है। किसानों को धान की नर्सरी डालने में देर हो रही है।
इसके अलावा उड़द, मूंग, हरा चारे की फसल पानी के अभाव में सूख रही है। डलमऊ पंप कैनाल से छोटी और बड़ी 80 नहरों में पानी जाता है। इन नहरों से करीब एक लाख किसान सिंचाई करते हैं। दशकों से डलमऊ पंप की मोटरें और पंप जर्जर हैं। इससे किसान सिंचाई के संकट से जूझ रहे हैं। पांच पंपों की मोटरों को बदलने का काम तीन महीने से चल रहा है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो पाया है। मौजूदा समय में जो पानी चल रहा है, उसे एनटीपीसी भेजा जा रहा है। यही वजह है कि नहरों में पानी नहीं पहुंच रहा है।
नहरों के पानी पर निर्भर है खेती
परिवार चलाने का मुख्य जरिया खेती है। ज्यादातर खेतों में धान की खेती करते हैं। धान की नर्सरी डालने का उचित समय निकला जा रहा है। पानी के अभाव में अब तक धान की नर्सरी नहीं पड़ी है।
- संतराम यादव, बहादुरगंज, दीनशाह गौरा
नहीं हो पाई ढैंचा की बोआई
धान की रोपाई से पहले खेत में ढैंचा की बोआई करनी थी। तैयारी कर ली थी, लेकिन नहर में पानी नहीं आया। इस वजह से ढैंचा की बोआई नहीं हो सकी। नर्सरी डालने का काम भी शुरू नहीं हो पाया।
- समर बहादुर सिंह, किशोरी बालमपुर गदागंज
बिना पानी खेती घाटे का सौदा
सिंचाई के लिए निजी नलकूप चालकों को 100 रुपये घंटे के हिसाब से रुपये देना पड़ता है। धान की नर्सरी तो डाल दी है, लेकिन नहर में पानी न आया तो रोपाई कराना मुश्किल हो जाएगा।
- विपुल त्रिवेदी, रोझइया, जगतपुर
झांड़ियों से पटी नहरें
कभी कभार नहरों में पानी छोड़ा जाता है तो टेल तक नहीं पहुंचने से पहले बंद कर दिया जाता है। झांड़ियों से पटी नहरों की सफाई में औपचारिकता की जाती है।
- संतोष तिवारी, पूरे महादेवन, जगतपुर
मांग के अनुसार चल रहे पंप
मौजूदा समय में सात पंप चलाने की मांग है। उसी हिसाब से पंप चलाए जा रहे हैं। यदि मांग बढ़ती है तो और पंप चलाए जाएंगे। पांच पंप में नई मोटरें और पंप लगाए जा रहे हैं। 20 जून तक नए पंप चालू कर दिए जाएंगे।
-आनंद कुमार, सहायक अभियंता सिंचाई खंड छह