रायबरेली। अदालत ने किशोरी का अपहरण कर दुराचार किए जाने के मामले में अभियुक्त को 12 साल की सजा सुनाई, जबकि 31 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। पर्याप्त साक्ष्य न होने पर एक आरोपी को बरी कर दिया गया। यह फैसला एफ टीसी कोर्ट संख्या एक के अपर सत्र न्यायाधीश रामदयाल ने सुनाया।
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले एडीजीसी (क्रिमिनल) ओम प्रकाश के मुताबिक मामले की रिपोर्ट पीड़िता के भाई ने कोतवाली डलमऊ में दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार 6 जुलाई 2012 को पढ़ने गई वादी की नाबालिग बहन को जीवन मशीह बहला फुसलाकर कहीं भगा ले गया। बरामदगी के बाद पीड़िता ने बलात्कार की बात भी बताई।
पुलिस ने विवेचना के बाद जीवन मशीह व श्रीनाथ के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर जीवन मशीह को 12 वर्ष के कारावास व 31 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में दूसरे आरोपी श्रीनाथ को बरी कर दिया। यह फैसला घटना के सात साल बाद आया।