जिला अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कोर्ट के आदेश पर सीएमएस के सरकारी आवास को गिराने के लिए लोग पहुंच गए।
पुलिस फोर्स के साथ जेसीबी आई देख कर्मियों में अफरातफरी मच गई। इस दौरान चिकित्सकों और ध्वस्तीकरण करने पहुंचे लोगों के बीच नोकझोंक भी हुई।
हालांकि डीएम एसपी गंगवार के दखल के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई टल गई। अमर नगर निवासी दलजीत सिंह समेत अन्य कई लोगों ने सीएमएस आवास समेत अस्पताल के अन्य भवनों की भूमि पर अपना स्वामित्व बताकर कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया था।
सिविल कोर्ट से अपने पक्ष में फैसला आने के बाद दलजीत व अन्य मुकदमे के अन्य वादी सोमवार को जेसीबी लेकर भूमि पर कब्जा करने पहुंच गए।
उनके साथ पुलिस फोर्स भी थी। फोर्स और जेसीबी आया देख मौके पर तमाशबीनों की भीड़ लग गई। अस्पताल के चिकित्सकों ने इसका विरोध किया।
इसे लेकर दोनों पक्षों में जमकर तकरार हुई। भवन गिराए जाने की सूचना अस्पताल प्रशासन ने डीएम को दी। साथ ही मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने की बात कहकर ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की मांग की। डीएम के दखल पर कार्रवाई रुकी।
जिला अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस डॉ. बीरबल का कहना है कि सीएमएस आवास व अस्पताल की अन्य भूमि के स्वामित्व का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
इस बात को छिपा कर भूमि को अपना बता रहे लोग निचली कोर्ट के आदेश का हवाला देकर भवन गिराने पहुंच गए थे।