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Raebareli News: ठेका देकर नशीले कफ सीरप की बिक्री करवाता था दिवाकर

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रायबरेली। नशीले कफ सीरप की बिक्री के मामले में जिस दवा कारोबारी दिवाकर का नाम सामने आया है, अब जांच में उसके कारनामे भी सामने आने लगे हैं। जांच में पता चला है कि दिवाकर ठेका देकर लोगों से कफ सीरप की बिक्री करवाता था। इसके एवज में उन्हें कमीशन देता था। दिवाकर से जुड़े ये लोग मेडिकल स्टोर संचालकों सीरप खरीदने के लिए बरगलाते थे। हालांकि, ज्यादातर मेडिकल स्टोर संचालक कार्रवाई के डर से सीरप बेचने से मना कर देते थे। पुलिस दिवाकर और उसके साथी प्रियांशू की तलाश में लगी है।
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औषधि निरीक्षक शीवेंद्र प्रताप सिंह ने 18 अक्तूबर 2025 को मिल एरिया थाने में शहर के कल्लू का पुरवा निवासी व अजय फार्मा के संचालक दिवाकर सिंह के खिलाफ नशीला कफ सीरप बेचने की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। एफआईआर में दिवाकर के अलावा मेडिसन हाउस बकुलिहा सेमरी के संचालक प्रियांशू गौतम के भी इसमें शामिल होने का जिक्र किया गया है। जांच में पता चला कि दिवाकर ने साढ़े पांच लाख और प्रियांशूू ने एक लाख सीरप की बिक्री है। जिले में दिवाकर से जुड़े लोग भी सीरप की बिक्री में सक्रिय थे।

जिला अस्पताल चौराहा, एम्स, लालगंज, सलोन, ऊंचाहार आदि कस्बों में जाकर दिवाकर से जुड़े लोग मेडिकल स्टोर संचालकों को उनका कफ सीरप लेकर बेचने के लिए बरगलाते थे। मेडिकल स्टोर संचालकों को यह भी झांसा देते थे कि आधा पैसा पहले दे दो और फिर आधा पैसा सीरप की बिक्री के बाद देना।
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शहर के इंदिरा नगर के एक दवा कारोबारी का नाम भी सामने आया है, जिसने दिवाकर के जरिये सीरप की खरीदारी करके उसकी बिक्री की है। सीरप बिक्री से दिवाकर के नौ करोड़ से ज्यादा रुपये कमाने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस के साथ ही एसटीएफ भी दिवाकर और उसके साथी प्रियांशू की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। दोनों आरोपियों ने मोबाइल भी स्विच ऑफ कर रखा है। ऐसे में पुलिस को उन तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।

इन नर्सिंगहोम पर क्यों मेहरबान विभाग
दवा कारोबारी दिवाकर की दुकान से मिले दस्तावेजों से पता चला है कि डॉ. सफत खान मलिकमऊ घोसियाना रायबरेली, शिफा हॉस्पिटल नसीराबाद सलोन, शिवशक्ति मेडिकल स्टोर मरियानी बाजार छतौना को भी नशीले कफ सीरप की आपूर्ति की गई थी। डॉ. सफत खान के यहां 85 तथा शिफा हॉस्पिटल में 150 कफ सीरप की आपूर्ति की बात सामने आई थी। औषधि से संंबंधित क्रय दस्तावेज केवल शिफा हॉस्पिटल के संचालक के पास मिले थे। सवाल उठ रहे हैं कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग इन नर्सिंगहोम के संचालकों पर क्यों मेहरबान है। इन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।

किसी को बख्शा नहीं जाएगा
नशीले कफ सीरप की बिक्री के मामले की जांच और तेज हो गई है। दिवाकर और उसके साथी प्रियांशू की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगाई गई हैं। इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों को भी चिह्नित किया जा रहा है। किसी को बख्शा नहीं जाएगा। इस कारोबार से जुड़े सभी लोग जेल जाएंगे।
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अरुण कुमार नौहवार, सीओ सदर
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