प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के आदेश को ताक पर रखकर जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं से ब्लड टेस्ट के नाम पर हो रही वसूली थम नहीं सकी है। सीएमओ ने मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने जांच को दबा दिया है।
पैथालॉजी के इंचार्ज को नोटिस देकर इतिश्री कर ली। कर्मचारियों पर नोटिस का भी असर नहीं हुआ। ऐसे में खुलेआम प्रसूताओं से जांच के नाम पर वसूली की जा रही है। सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी के लिए प्रदेश सरकार ने सभी सरकारी अस्पतालों में रोगियों की जांच को मुफ्त कर दिया है।
महिला अस्पतालों में तो ब्लड की जांच के साथ अल्ट्रासाउंड को भी मुफ्त कर दिया गया है। जिला महिला अस्पताल में शासन के आदेश को ताक पर रखा गया है। पैथालॉजी में ब्लड की जांच के नाम पर पहले की ही तरह शुल्क लिया जा रहा है। इसके बदले में प्रसूताओं को रसीद भी नहीं दी जाती है।
रुपये न देने पर महिलाओं के ब्लड की जांच तक नहीं होती है। ‘अमर उजाला’ ने 10 मार्च के अंक में जिला महिला अस्पताल में इस लूटखसोट को उजागर किया तो सीएमओ डॉ. राकेश कुमार यादव ने सीएमएस डॉ. रीता भाटिया को मामले की जांच कराकर वसूली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
सीएमओ के निर्देश के बाद भी जांच नहीं हुई। ब्लड टेस्ट के नाम पर महिलाओं से 40 से 120 रुपये तक वसूला जा रहा है। सीएमएस ने पैथालॉजी के प्रभारी डॉ. मनोज कुमार खरे को नोटिस दिया, लेकिन अब तक जवाब तक मिला। ऊपर से वसूली भी बंद नहीं की गई है।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. रीता भाटिया का कहना है कि पैथालॉजी के प्रभारी को नोटिस दिया गया है। ब्लड टेस्ट के नाम पर प्रसूताओं से वसूली न करने के आदेश दिए गए हैं। नोटिस का जवाब न मिलने पर दोबारा पत्र जारी किया जा रहा है। यदि वसूली बंद नहीं की गई है तो दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।