शहर के एक होटल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रमाणपत्र दिखाते प्रतिभागी।
रायबरेली। मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के साथ ही गर्भवती व धात्री महिलाओं में एनीमिया की कमी को दूर करने के लिए फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन लगाया जाएगा। पायलट प्रोग्राम के तहत रायबरेली समेत सात जिलों में यह इंजेक्शन उपलब्ध कराया गया है। जिले की सभी पांच फर्स्ट रेफरल यूनिटों में गर्भवती महिलाओं को यह इंजेक्शन लगाने की सुविधा मिलेगी। सोमवार को स्वास्थ्य महानिदेशक (प्रशिक्षण) ने पैरामेडिकल स्टाफ को इंजेक्शन लगाने का प्रशिक्षण भी दिया।
इस मौके पर स्वास्थ्य महानिदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. रंजना खरे ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती है। एफआरयू स्तर पर एफसीएम की उपलब्धता से मध्यम व गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को खून की कमी से राहत मिलेगी। सरकार की यह पहल एनीमिया से ग्रसित महिलाओं के लिए काफी कारगर साबित होगी।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) लखनऊ की प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल ने बताया कि शरीर में आयरन की कमी, विटामिन बी-12 की कमी आदि सहित अन्य समस्याओं से एनीमिया का खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं में एनीमिया का सबसे सामान्य कारण आयरन व आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होना है।
इस कमी को दूर करने के लिए एफसीएम इंजेक्शन एक सुरक्षित एवं प्रभावी विकल्प है। इस संबंध में केजीएमयू में किए गए शोध में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसके आधार पर ही सरकार ने इसे अब पायलट प्रोजेक्ट के बतौर लागू करने का निर्णय लिया है। सीएमओ डॉ. नवीनचंद्रा ने बताया कि एनीमिया प्रबंधन की यह पहल भविष्य में कापी सकारात्मक परिणाम देगी।
उन्होंने बताया कि जिला महिला अस्पताल के साथ ही पांचों फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) सलोन, बछरावां, डलमऊ, लालगंज, ऊंचाहार से तीन-तीन पैरामेडिकल स्टाफ को इसके लिए प्रशिक्षित किया गया है। भविष्य में अन्य सीएचसी के स्वास्थ्यकर्मियों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान 10 एनीमिक गर्भवती महिलाओं को पोषण पोटली भी दी गई। इस मौके पर सीएमएस डॉ. निर्मला साहू, डिप्टी सीएमओ डॉ. शरद कुशवाहा, जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डीएस अस्थाना सहित अन्य लोग मौजूद रहे।