कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी बिना इमरजेंसी मेडिकल अफसर (ईएमओ) के ही चल रही है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों को ओपीडी और ऑन कॉल ड्यूटी के साथ ही इमरजेंसी को भी चलाना पड़ रहा है। जब विशेषज्ञ ईएमओ का काम करेंगे तो ओपीडी का प्रभावित होना लाजमी हैं, लेकिन इस ओर अफसरों का ध्यान नहीं जा रहा है।
इमरजेंसी में ईएमओ के चार पद हैं। इनमें से दो पद करीब एक साल से खाली थी। शेष दो पदों पर डॉ. बीके पाठक और डॉ. पवन जायसवाल की तैनाती थी। ईएमओ के साथ ही विशेषज्ञ भी इमरजेंसी संभालते थे।
जुलाई में डॉ. पाठक का लखनऊ और डॉ. जायसवाल का महराजगंज स्थानांतरण हो गया। दोनों चिकित्सकों के तबादले के बाद इमरजेंसी में ईएमओ के चारों पद खाली हो गए। पहले जहां विशेषज्ञों की मदद ली जाती थी, अब वहीं इमरजेंसी सुविधा पूरी तरह से विशेषज्ञ चिकित्सकों पर आधारित हो गई है।
ससे ओपीडी में आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिला अस्पताल में सर्जन चिकित्सकों के दो पद हैं। इनमें से एक खाली चल रहा है। एकमात्र सर्जन डॉ. जेके लाल की शुक्रवार को इमरजेंसी में ड्यूटी लगी थी।
इसके चलते ओपीडी नहीं देख सके। मरीजों ने काफी देर तक ओपीडी के पास इंतजार किया। कुछ मरीज तो दूसरे सर्जन डॉक्टर की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे, फिर वापस लौट गए। वहीं कुछ डॉ. लाल को ढूंढते हुए इमरजेंसी पहुंच गए।
जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. एनके श्रीवास्तव ने बताया कि इमरजेंसी में ईएमओ के चारों पद खाली हैं। इसके साथ ही सर्जन, फिजीशियन के एक-एक और बेहोशी के चिकित्सकों के दोनों पद रिक्त हैं। ईएमओ की तैनाती न होने से विशेषज्ञों की ड्यूटी इमरजेंसी में लगाई जा रही है। डॉक्टरों की तैनाती के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।