रायबरेली। जिले में मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) के तहत खर्च हुई धनराशि का ऑडिट सोमवार से शुरू हो गया। तीन दिन तक चलने वाले इस ऑडिट के पहले दिन छह विकास क्षेत्रों के 653 परिषदीय विद्यालयों से तीन वित्तीय वर्षों के खर्च का ब्योरा और संबंधित अभिलेख मंगाकर उनकी जांच की गई। प्रयागराज से आई छह सदस्यीय टीम ने वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के आय-व्यय का मिलान किया।
प्रधान महालेखाकार, प्रयागराज के निर्देश पर एमडीएम योजना के तहत विद्यालयों को उपलब्ध कराई गई धनराशि और उसके व्यय का ऑडिट कराया जा रहा है। सोमवार को अमावां, बछरावां, छतोह, डलमऊ, डीह और दीनशाह गौरा विकास क्षेत्र के विद्यालयों के अभिलेख जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत किए गए।
भीड़ से बचने के लिए पांच विकास क्षेत्रों में ब्लॉक स्तर पर नोडल अधिकारी नामित किए गए थे, जिन्होंने संबंधित विद्यालयों के अभिलेख एकत्र कर ऑडिट टीम को उपलब्ध कराया। हालांकि अमावां विकास क्षेत्र से अधिकांश विद्यालयों के शिक्षक स्वयं अभिलेख लेकर पहुंचे, जिससे बीएसए कार्यालय परिसर में काफी भीड़ रही।
जिला समन्वयक (एमडीएम) विनय कुमार तिवारी ने बताया कि प्रयागराज से आई छह सदस्यीय टीम तीन वित्तीय वर्षों के अभिलेखों का परीक्षण कर रही है। 21 जुलाई को जगतपुर, खीरों, हरचंदपुर, लालगंज, महराजगंज और नगर क्षेत्र के विद्यालयों के अभिलेखों की जांच होगी। वहीं 22 जुलाई को राही, रोहनिया, सलोन, सरेनी, सतांव, शिवगढ़ और ऊंचाहार विकास क्षेत्रों के विद्यालयों के दस्तावेजों का ऑडिट किया जाएगा।