शिक्षिकाओं को मातृत्व, शिशु देखभाल व मिसकैरेज अवकाश देने का अधिकार खंड शिक्षा अधिकारियों से वापस ले लिया गया है। दो साल पहले ही बीईओ को यह अधिकार दिए गए थे, लेकिन बीआरसी में इन अवकाशों के संबंध में लेखाजोखा तक उपलब्ध नहीं हैं।
अवकाश देने के नाम पर गड़बड़ी के मामले में प्रकाश में आने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दे दी गई है। दो साल पहले खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने ब्लॉकों में शिक्षिकाओं को मातृत्व, शिशु देखभाल व मिसकैरेज अवकाश स्वीकृत करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
खंड शिक्षा अधिकारियों ने अपने स्तर से ये अवकाश स्वीकृत किए। खास बात यह कि कितनी शिक्षिकाओं को कौन सा अवकाश दिया गया इसकी रिपोर्ट जिला मुख्यालय नहीं आई। बताते हैं कि अवकाश देने के नाम पर ब्लॉकों में जमकर घालमेल हुआ। सभी ब्लॉकों में इससे संबंधित लेेखाजोखा तक उपलब्ध नहीं है।
शिक्षिकाओं ने जब तक चाहा अवकाश का लाभ उठाया। सिर्फ बीआरसी के अधिकारियों व कर्मचारियों की जेब को गर्म रखा। सचिव के आदेश पर सहायक शिक्षा निदेशक राम सिंह ने दो दिन पहले पत्र जारी करके बीएसए को शिक्षिकाओं को मातृत्व, शिशु देखभाल व मिसकैरेज अवकाश जिले स्तर से स्वीकृत करने के आदेश दिए हैं।
इसका लेखाजोखा भी जिले पर रखने के आदेश दिए हैं। एक प्रपत्र भी आया है जिसमें पूरा विवरण भरकर सुरक्षित रखा जाएगा। हर महीने इन अवकाशों के संबंध में रिपोर्ट भी शासन को भेजी जाएगी। बीएसए रामसागर पति त्रिपाठी का कहना है कि शिक्षिकाओं को मातृत्व, शिशु देखभाल व मिसकैरेज अवकाश देने की जिम्मेदारी वर्ष 2014 में बीईओ को दी गई थी। अब इसे वापस लेकर बीएसए को सौंपी गई है। आदेश आ गया है। अनुपालन शुरू करा दिया गया है।