रायबरेली। बारिश के साथ ही जिले में डेंगू का खतरा बढ़ गया है। इस साल निजी पैथोलॉजी संचालक डेंगू जांच के नाम पर वसूली नहीं कर पाएंगे। शासन स्तर से जांच के रेट तय कर दिए गए हैं। अब तक डेंगू जांच के नाम पर मरीजों से 1500 से लेकर दो हजार रुपये तक निजी पैथोलॉजी संचालक वसूलते थे। सीएमओ ने इस मनमानी को रोकने के लिए डेंगू की जांच के लिए रेट तय कर दिए हैं।
जांच के नाम पर 600 रुपये से अधिक नहीं वसूले जाएंगे। मनमानी को रोकने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी भी गठित कर दी गई है। डेंगू के संक्रमण के बढ़ने से पहले स्वास्थ्य विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सीएमओ ने सभी पैथोलॉजी के संचालकों को निर्देश दिए कि वे रोजाना डेंगू की जांच रिपोर्ट विभाग को उपलब्ध कराएंगे। डेंगू की जांच के लिए मरीजाें से 600 रुपये से अधिक की वसूली नहीं की जाएगी।
डेंगू नियंत्रण के लिए सीएमओ ने पांच अधिकारियों की कमेटी भी गठित की है। कमेटी में एसीएमओ डॉ. श्रीकृष्णा को अध्यक्ष बनाया गया है। सदस्यों में एसीएमओ डॉ. अरविंद कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी रमेश चंद्र यादव, पैथोलॉजिस्ट डॉ. स्वेता, डॉ. ऋषी बागची को शामिल किया गया है।
सीएमओ डॉ. नवीनचंद्रा ने बताया कि कोई भी पैथोलॉजी संचालक तय शुल्क से अधिक रुपये की वसूली नहीं करेंगे। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। मरीजों को राहत देने और मनमानी वसूली रोकने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। डेंगू जांच शुल्क के अनुपालन की निगरानी के लिए पांच अधिकारियों की एक समिति का गठन किया है। जिले में डेंगू पर पूरी तरह से नियंत्रण रखने के निर्देश दिए गए है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।