रायबरेली। नहरों की सफाई के नाम पर भले ही हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन सिल्ट सफाई के नाम पर सिर्फ कमीशनबाजी का खेल चलता है। यही वजह है कि नहरों की सफाई नहीं होती। इसका खामियाजा चार लाख किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
किसान नेता समय-समय पर आवाज उठाते हैं, लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया जाता है। यही वजह है कि किसान पूरे साल सिंचाई की समस्या से जूझते हैं। जिले से होकर 435 नहरें गुजरी हैं। इन नहरों की लंबाई करीब 2200 किमी है। नहरों में साल में एक बार सफाई होती है। सफाई में खानापूर्ति की वजह से बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हैं। जब कभी पानी भी छोड़ा जाता है, तो टेल तक नहीं पहुंच पाता।
सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्हें सिर्फ कमीशन से मतलब रहता है। इस समय नहरों में धूल उड़ रही है। ऐसे में किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। बारिश भी नहीं हो रही है, ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रहीं हैं।
हक के लिए उठाई जाती आवाज
सरेनी। किसानों के हक के लिए समय-समय पर आवाज उठाई जाती है। इस समय नहरों में पानी की जगह धूल उड़ रही है। धान की रोपाई का समय निकला जा रहा है। ठीक से सफाई नहीं होने के कारण टेल तक पानी ही नहीं पहुंच पाता। सफाई के नाम पर केवल औपचारिकता होती है।
- अभितेंद्र सिंह राठौर, राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तर प्रदेश किसान मंच
नहरों में उगी हैं झाड़ियां
डीह। क्षेत्र की नहरों में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हैं। सफाई के नाम पर नहरों को केवल रोड क्राॅसिंग के पास चमकाया जाता है। यही वजह है कि किसानों को पूरे साल पानी के संकट से जूझना पड़ता है। इस समय धान की नर्सरी डालने, तो कुछ किसान रोपाई के लिए पानी के संकट से जूझ रहे हैं।
- शिव प्रसाद यादव, जिला उपाध्यक्ष, भाकियू
जरूरत के समय गायब रहता पानी
भोजपुर। देश की अर्थव्यवस्था में किसानों का अहम योगदान है। इसके बावजूद वे उपेक्षित हैं। जरूरत के समय नहरों में पानी नहीं आता। खाद, बीज के लिए भी परेशानी झेलनी पड़ती है। धान की रोपाई का समय है। नहरों में जल्द पानी छोड़ा जाए, नहीं तो धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
- पप्पू मिश्रा, जिला प्रवक्ता भाकियू भानू गुट
बिजली व पानी के संकट से जूझ रहे किसान
बछरावां। क्षेत्र के किसान बिजली, पानी का संकट झेल रहे हैं। खरीफ सीजन में अब तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया। इस वजह से अधिकांश किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पाए हैं। सफाई के नाम पर धन का बंदरबांट किया जाता है। यही वजह है कि खेती के लिए भरपूर पानी नहीं मिल पाता।
- आकाश मिश्रा मंडल प्रभारी, भाकियू भानू गुट बछरावां