मोहन सिंह नेत्र चिकित्सालय में घुसकर आधा दर्जन बदमाशों ने शुक्रवार को दोपहर अंधाधुंध फायरिंग की। इससे वार्डों में भर्ती रोगियोें में अफरातफरी मच गई। शीशे टूट गए और दहशत फैल गई। गनीमत रही कि बदमाशों की ओर से की गई फायरिंग से किसी रोगी को गोली नहीं लगी।
एक युवक को जान से मारने की नियत से बदमाशों ने दौड़ाया तो वह अस्पताल में घुस गया था। सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तहकीकात की। जांच-पड़ताल के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से खोखे बरामद किए हैं। फायरिंग इस कदर की गई कि अस्पताल के शीशे टूट गए। साथ ही दीवारों पर गोली के निशान बन गए। पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है।
शहर के हाथी पार्क से चंद कदम की दूरी पर मोहन सिंह नेत्र चिकित्सालय है। शुक्रवार को दोपहर बाद करीब दो बजे छह बदमाश एक युवक को जान से मारने की नियत से दौड़ाए हुए थे। जान बचाने की नियत से युवक अस्पताल के अंदर घुस गया। इस पर पीछा कर रहे बदमाश अंदर घुस गए, लेकिन युवक रोगियों के बीच जाकर छिप गया।
इससे बदमाश उसे नहीं पकड़ पाए। जिससे बौखलाए बदमाशों ने अस्पताल में असलहों से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस पर अस्पताल के कर्मचारी भाग खड़े हुए। गनीमत रही कि जिस समय फायरिंग की गई, उस समय अस्पताल की ओपीडी बंद हो चुकी थी।
वारदात की सूचना पर जहानाबाद चौकी इंचार्ज धीरेंद्र यादव, त्रिपुला चौकी इंचार्ज रावेेेंद्र सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने अस्पताल के कर्मचारियों व डॉक्टरों से घटना के बाबत पूछताछ की, लेकिन इस बारे में कोई कुछ नहीं बता पाया। मौके पर पुलिस को न तो पीड़ित युवक मिला और न ही बदमाश।
जांच के दौरान घटनास्थल से पुलिस को कारतूस के खोखे मिले। इस संबंध में कोतवाल सुधीरचंद्र पांडेय का कहना है कि युवक और हमलावरों के बाबत कोई जानकारी नहीं है। वहीं, अस्पताल का स्टाफ और भर्ती रोगी भी कुछ ज्यादा नहीं बता पा रहे हैं। तहरीर भी नहीं मिली है। हमलावरों के बारे में पता लगाया जा रहा है। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
फिल्मी अंदाज में जिस तरह मोहन सिंह नेत्र चिकित्सालय में बदमाशों की ओर से अंधाधुंध फायरिंग की गई, उसने पुलिसिया सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वह अब अस्पताल में दिनदहाड़े घुसकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
घटना के बाद से आसपास के लोग दहशत में नजर आए। रमेश कुमार, दिनेश सिंह, सतेंद्र का कहना था कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं वार्डों में भर्ती रोगी इस कदर दहशत में दिखे कि कुछ भी बताने से इंकार करते रहे। अस्पताल के डॉक्टर भी घटना की बाबत कुछ नहीं बताए।