मिठाई में खिला रहे एल्युमीनियम वर्क
रायबरेली। जिले में मिलावटखोर लोगों की सेहत के दुश्मन बन गए हैं। लखनऊ की विधि विश्लेषक प्रयोगशाला जांच में इसका खुलासा हुआ है।
मिठाइयों में चांदी की जगह एल्युमीनियम वर्क खिलाया जा रहा है। यही नहीं सड़ा व बदबूदार सरसों का तेल भी लोगाें को परोसा जा रहा है।
बावर्ची ब्रांड बेसन में सिंथेटिक कलर मिला है। प्रयोगशाला की जांच में नमूने असुरक्षित घोषित होने के बाद दुकानदारों को नोटिस दिया गया है। साथ ही एसीजेएम कोर्ट में मुकदमे की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
एफएसडीए के खाद्य सुरक्षा अधिकारी अरुण कुमार ने महाराजगंज कस्बे में प्रभात किराना स्टोर से सरसाें तेल का नमूना सील कर जांच के लिए भेजा था।
विधि विश्लेषक प्रयोगशाला की जांच में पता चला कि सरसों का तेल खाने योग्य नहीं है। वह काफी पुराना होने के कारण खराब हो गया है और बदबूदार हो गया है।
एफएसओ स्वाती सिंह ने भी महाराजगंज में समीर की दुकान से बर्फी का नमूना भरा था। जांच में पाया गया कि बर्फी के ऊपर लगा वर्क चांदी का न होकर एल्युमीनियम का है। जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।
प्रभात किराना स्टोर महाराजगंज से ही भरे गए बावर्ची ब्रांड बेसन में प्रतिबंधित कलर पाया गया जिसके कारण नमूने को असुरक्षित घोषित कर दिया गया है।