रायबरेली। पुलिस की पूछताछ में जाली नोट कारोबार के मामले में पकड़े गए आरोपियों से अहम जानकारी मिली है। यह आरोपी रायबरेली ही नहीं, बल्कि कई प्रांतों में जाली नोट का कारोबार फैलाए थे। अधिक जाली नोट देकर कम रुपये लेकर आसानी से यह अपने मकसद में कामयाब हो जाते थे। खास बात ये है कि खाकी से बचने के लिए एक स्थान पर ज्यादा दिन तक नहीं रुकते थे। किराए का कमरा लेकर जाली नोट छापते थे और कुछ दिन बाद दूसरे स्थान पर जाकर यह कारोबार करने लगते थे।
सीओ महराजगंज विनीत सिंह बताते हैं कि जाली नोट का कारोबार करने के मामले में पकड़ा गया गैंग धीरे-धीरे और सक्रिय हो रहा था। रायबरेली के अलावा उन्नाव, कानपुर, लखनऊ और मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड प्रांतों में जाली नोट छापने के बाद खपाए जाते थे। सीओ कहते हैं कि 10 हजार रुपये जाली नोट के बदले तीन हजार रुपये लेते थे।
महराजगंज क्षेत्र के रानी का पुरवा में करीब एक माह पहले ही किराए का कमरा लेकर जाली नोट छापने का धंधा शुरू किया था, लेकिन मुखबिर की सूचना पर छापा मारकर इस रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया गया। पुलिस क्षेत्राधिकारी ने कहा कि पकड़े गए कारोबारी कहां-कहां पर किराए का कमरा लेकर जाली नोट छापने का कार्य करते थे, इसकी पड़ताल की जा रही है। इस धंधे में और कितने लोग जुड़े हैं, इस बारे में भी पड़ताल की जा रही है। आरोपियों की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। इसके जरिए पता लगाया जा रहा है कि इनके पास कौन-कौन लोग फोन करते थे।
जाली नोट के मामले में पकड़े कारोबारियों को छुड़ाने के लिए कोतवाल से लेकर पुलिस अफसरों के पास फोन घनघनाते रहे, लेकिन किसी की भी नहीं चली। बताते हैं कि कोतवाल और सीओ के पास इस बात के फोन आते रहे कि कारोबारियों को छोड़ दिया जाए, पर पुलिस की सख्ती के आगे उनकी एक नहीं चली। सीओ का कहना है कि अपराधियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।