बछरावां (रायबरेली)। ...यहां दिन में भी घरों के दरवाजे बंद रहते हैं। डरे-सहमे लोग न किसी से मिल रहे हैं न ही दुआ-सलाम हो रही है। लोग बस घरों के अंदर दुबके बैठे रहते हैं। गांव-गलियारों, घरों के चबूतरों, खेतों की मेड़ों पर लगने वाली चौपालें बंद हैं।
गांवों में अजीब सा सन्नाटा है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की नींद नहीं टूट रही है। करीब एक माह में तीन गांवों में 50 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। एक के बाद एक हुई मौतों से समूचे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
ज्यादातर मौतें सांस लेने में तकलीफ के साथ बुखार की वजह से हुईं हैं। तीनों गांवों में बुरी तरह संक्रमण फैला है। अभी भी इन गांवों में दर्जनों लोग बुखार, खांसी, सर्दी, जुकाम से पीड़ित हैं। इतनी बड़ी तादाद में हुई मौतों से गांवों में दहशत है। लोग डर के मारे जांच कराने भी नहीं जा रहे हैं।
सेहगों पश्चिम गांव में 20 दिन पहले काशी प्रसाद की बुखार से मौत हो गई। महज आधे घंटे के भीतर बहू शिवकुमारी (38) ने भी दम तोड़ दिया। 22 दिन पूर्व आलोकी देवी (64) की जान चली गई।
इसके दूसरे दिन उसके पति विशाल लाल की भी मौत हो गई। मृतक दंपती सर्दी-जुखाम-बुखार से पीड़ित थे। विजय बहादुर (55) सर्दी-जुकाम-बुखार से पीड़ित थे। दवा लेने मोहनलालगंज जा रहे थे, तभी रास्ते में सांस फूलने की वजह से दम घुट गया और उसकी मौत हो गई।
शांति (50) पत्नी रामनरेश, भगवान देवी (53) पत्नी सुधीर मिश्रा, दद्दा बाबा (60) पुत्र जगन्नाथ, विनोद कुमार (42) पुत्र हरिश्चंद्र, रामप्यारी (48) पत्नी शंभू दयाल, भगवान देवी (54) पत्नी राम स्वरुप, ब्रजकिशोर बाबूजी (62), सुंदारा देवी पत्नी विशाल सिंह, दशादीन पुत्र बैजू, रामफल (48) आदि की मौत हो चुकी है।
रामपुर सुदौली गांव में एक माह के अंदर शिक्षक आलोक श्रीवास्तव, पीएचसी में तैनात दाई श्रीमती कृष्णापाल, शिवकरन सिंह, बादशाह पांडेय, रामू त्रिपाठी, युवराज कश्यप की पत्नी, शमीम खान की पत्नी, श्री कृष्ण यादव, नूर कसगर की पत्नी, पप्पू की पत्नी, रामआसरे कश्यप, महावीर की पत्नी, रज्जब रायनी, बाबू मंसूरी की पत्नी, सिराजुद्दीन की पत्नी, मो.हुसैन मंसूरी, आमीना ढपाली, मुम्मी रायनी, भगवंत पासवान, खैरून निशा, मोतीलाल आदि की सर्दी-जुखाम-बुखार से से पीड़ित होने के कारण मौत हुईं हैं।
शेषपुर समोधा गांव में दशरथ सिंह, राम लखन सिंह, विपिन सिंह, रोहित कुमार, बबलू सिंह, राजेश कुमार, रामखेलावन, छत्रपाल, पंचम, चंद्रकांत त्रिपाठी, मंगला मिश्रा की पत्नी समेत कई लोगों की मौत सर्दी-जुकाम-बुखार के कारण हुई है।
मिल जाता इलाज तो बच जाती जान
अवध किशोर, आदेश कुमार, साकेत त्रिपाठी, राकेश कुमार का कहना है कि समय रहते लोगों को अगर उचित चिकित्सीय परामर्श मिल जाता एवं गांव में दवा का छिड़काव हो जाता तो जान बच सकती थी।
तीन गांवों में एक माह में इतनी मौतें हो जाने के बाद भी गांव में न तो कोई जांच कराई गई और न ही कोई स्वास्थ्य टीम आई। संक्रमण को कम करने के लिए दवा का भी छिड़काव नहीं कराया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लोगों की सेहत ध्यान रखने के बजाय लापरवाही बरत रहे हैं। प्रशासन महज जांच कराने व दवा छिड़काव का ढोंग कर रहा है। जमीनी हकीकत कुछ और है। प्रशासन महज जानकारी न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेता है।
सेहगों पश्चिम, रामपुर सुदौली और शेषपुर समोधा में एक माह में 50 लोगों की मौत होने की जानकारी नहीं है। स्वास्थ्य टीम भेजकर मौतों के बारे में पता लगाया जाएगा। बछरावां ब्लॉक क्षेत्र के सभी गांव में स्वास्थ्य टीमें भेजी जा रही हैं और जांच कराई जा रही है।
डॉ. एके जैसल, सीएचसी अधीक्षक