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बेपटरी स्वास्थ्य सुविधाएं, एक माह में 30 लोगों ने गंवा दी जान

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ऊंचाहार (रायबरेली)। ब्लॉक मुख्यालय से जुड़ी ग्राम पंचायत पट्टी रहस कैथवल में करीब एक माह में 30 लोगों की मौत हो चुकी हैं। ज्यादातर मौतें सांस लेने में तकलीफ के साथ बुखार की वजह से हुईं हैं।
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अभी भी गांव के कई घरों में सांस व बुखार से पीड़ित कई मरीज हैं। इस वजह से गांव में सन्नाटा पसरा है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। साफ-सफाई भी बदहाल है। लापरवाही से गांव लोगों में गुस्सा है।
ब्लॉक मुख्यालय से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर यह गांव बसा है। गांव मुख्यालय से जुड़ा होने की वजह से सुविधाओं का मोहताज नहीं है। ग्राम पंचायत में पूरे कुर्मिन, पूरे चौहानन, हरिजन बस्ती, पक्का ताल, पूरे ननकू, पूरे तेवराइन, कोल्हउर, पूरे रानी, दलापुर, गंगा बिशुनपुर, अड्डा, हरबंधनपुर, बसिया की बाग, हरसकरी सहित 14 पुरवे हैं।
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यहां की आबादी लगभग 10 हजार है। यहां के लोग बुखार, खांसी व सांस की तकलीफ से पीड़ित हैं। गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र भी है। आशा बहुओं की भी तैनाती है।
बावजूद इसके आज तक गांव में लोगों की न जांच हुई और न ही किसी ने जानकारी करने की कोशिश की। इसका खामियाजा यह हुआ कि ग्राम पंचायत में एक माह के अंदर एक-एक कर 30 लोगों की मौत हो चुकी है।
घरों से लगातार उठ रही अर्थियों से गांव में कोहराम मचा है। गांव के दीपक सिंह ने बताते हैं कि उनके भाई राजीव सिंह को अचानक ऑक्सीजन की कमी हुई। सीएचसी लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टर ने आक्सीजन नहीं दी और उनकी मौत हो गई।
गांव के अनिल वाल्मीकि की पत्नी बिमला (42), सुभाषचंद्र की पत्नी गीता देवी (50), मिश्रीलाल की पत्नी मतऊ (52), कमलेश पटेल (45), अवशेष गुप्ता के पिता जयनारायण गुप्ता (55), रमन सिंह के पिता लल्लू सिंह (60), विन्ध्य उपाध्याय के पिता शशेंद्रकांत उपाध्याय (62), सरजू के पिता राम सजीवन अग्रहरि (65), राम प्यारे तिवारी (80), रामसमुझ पाल (65), संतराम रैदास (60), राम कुमार मौर्य (95), अवतार लोधी (60), मन्नू निर्मल (80), फूलकली (90) समेत ग्राम पंचायत में 30 लोगों की करीब एक माह में मौत हो चुकी है।
बताते हैं कि मरने वाले सभी लोगों को सांस लेने में तकलीफ व ऑक्सीजन की कमी थी। ये लोग बुखार व खांसी की समस्या से भी जूझ रहे हैं। गांव में होने वाली मौतों से मातम छाया हुआ है। गलियों मे सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव में साफ-सफाई की व्यवस्था ध्वस्त है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
अफसर लापरवाह, जांच तक नहीं की
गांव के सूरजलाल, मिश्रीलाल, अश्वनी कुमार, राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि गांव में इतनी मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच करने नहीं आई। लोगों को सांस लेने में दिक्कत थी।
समय पर इलाज न मिलने से लोगों की मौत हुई है। इनमें से अधिकतर लोगों को इलाज के लिए सीएचसी भी ले जाया गया लेकिन वहां तैनात डॉक्टर व स्टाफ मदद नहीं कर सका। गांव में गंदगी का अंबार है।
पांच साल से सफाई कर्मी नदारद हैं। गांव को सैनिटाइज भी नहीं कराया गया। कई बार आशा बहू के माध्यम से सूचना दी गई, लेकिन कोई नहीं आया। लोगों ने गांव को सैनिटाइज व जांच कराने की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग की नाकामी से लोगों में नाराजगी है।
गांव में टीम भेजकर जांच कराई गई है। दवा भी दी गई है। कुछ लोगों को वैक्सीन भी लगाई है। जो लोग बाकी हैं, उनकी भी जांच कराई जा रही है। चिकित्सा व्यवस्था में किसी प्रकार की कोताही नहीं की जा रही है।
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डॉ. एमके शर्मा, सीएचसी अधीक्षक
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