रायबरेली। लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद कोचिंग संस्थाओं पर संकट के बादल छाए हुए हैं। समस्या दूर करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई बार वार्ता हो चुकी है। तीन दिवसीय विशेष शिविर लगाया गया। बुधवार को अंतिम दिन फिर प्रशासन के साथ बैठक हुई। कोचिंग संचालकों की ओर से जनप्रतिनिधियों से भी मदद की गुहार लगाई जा चुकी है। इन सारे प्रयासों के बाद भी कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा है। हर बार एक ही जवाब मिलता है कि सभी मानक पूरे कर लें, तभी कोचिंग संचालन की अनुमति मिलेगी।
बुधवार को अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सिद्धार्थ) की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक हुई, जिसमें रायबरेली विकास प्राधिकरण (आरडीए) के सचिव विशाल यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक संजीव सिंह सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं विभिन्न कोचिंग संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। कोचिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह के मुताबिक बैठक में एडीएम ने स्पष्ट रूप से कहा कि निर्धारित सभी मानकों की पूर्ति होने के बाद ही कोचिंग संस्थानों को संचालन की अनुमति मिलेगी।
बैठक के दौरान कोचिंग संचालकों ने अपनी समस्याएं भी रखीं और कहा कि यदि सभी मानकों की पूर्ति के बाद ही संचालन की अनुमति मिलेगी तो उनकी आजीविका पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी। अधिकांश छोटे एवं मध्यम कोचिंग संस्थान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। फेडरेशन अध्यक्ष ने मानक पूरा होने तक किसी उपयुक्त सरकारी भवन या वैकल्पिक स्थान पर अस्थायी कक्षाएं चलाने की व्यवस्था करने की मांग की, लेकिन प्रशासन ने असमर्थता जता दी। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होगी।
शिक्षक विधायक से भी वार्ता, मिला आश्वासन
रायबरेली। कोचिंग फेडरेशन आफ इंडिया ने राहत पाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए हैं। शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी से भी फोन पर वार्ता की। फेडरेशन के जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह ने बताया कि शिक्षक विधायक से वार्ता हुई तो उन्होंने आश्वासन दिया है कि वह शीघ्र ही जिलाधिकारी से इस बारे में चर्चा करेंगे, ताकि कोचिंग संस्थानों की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। फेडरेशन अध्यक्ष का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में एक साथ सभी निर्धारित मानकों को पूरा कर पाना आसान नहीं है। विक्रम सिंह ने बताया कि अब तक जिले के 25 कोचिंग संस्थानों ने आवेदन फॉर्म प्राप्त किए हैं।