फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Raebareli News: खटारा वाहनों से ढोए जाते बच्चे

Tue, 14 Apr 2026 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
विज्ञापन
बस्तेपुर रोड पर टेंपो से स्कूल जाते बच्चे। 
विज्ञापन
रायबरेली। वाहन का फिटनेस नहीं है और हालत भी खराब हो चुकी है, इसके बावजूद ऐसे वाहन बच्चों को लेकर सड़कों पर फर्राटा भरते रहते हैं। इस पर अभिभावक चिंतित रहते हैं, लेकिन अफसर आंख बंद करके बैठे रहते हैं। अगर कोई हादसा हो जाता है तो जरूर नींद टूटती है, लेकिन महज वाहन के खिलाफ ही कार्रवाई होती है। परिवहन विभाग ज्यादा से ज्यादा वाहन को सीज करा देता है, लेकिन शिक्षा विभाग ऐसे मामलों में स्कूलों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से बचता है।
विज्ञापन

परिवहन विभाग इस बात का लगातार दावा करता है कि स्कूली वाहनों के खिलाफ नियमित चेकिंग अभियान चलाया जाता है। शिक्षा विभाग वाहनों की बात आने पर इसे परिवहन विभाग का मामला बताकर खामोशी अख्तियार कर लेता है। इतना जरूर कहता है कि हम लगातार जागरूकता अभियान चलाते हैं। जरूरत पड़ने पर परिवहन विभाग का पूरा सहयोग करते हैं। अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद रहते हैं, वहीं स्कूल संचालकों का अपना दर्द है। स्कूल संचालक दबी जुबान से कहते हैं कि जिन वाहनों में खामियां बताकर अक्सर परेशान किया जाता है, उन्हीं वाहनों को जरूरत पड़ने पर फिट मानकर बुला भी लिया जाता है।
सुरक्षा उपाय नहीं, भगवान भरोसे स्कूल जाते हैं बच्चे
ऊंचाहार क्षेत्र के डाडेपुर मजरे ईश्वरदासपुर गांव निवासी अभिभावक राज नारायण मिश्र का कहना है कि दो बच्चे अलग-अलग स्कूल में पढ़ते हैं, जो बसों से आते-जाते हैं। अधिकांश स्कूली वाहनों में अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स व अन्य सुरक्षा उपाय नहीं हैं। अकुशल चालकों से वाहन चलवाए जा रहे हैं। इससे बच्चों की जान जोखिम में रहती हैं। भगवान भरोसे बच्चों को स्कूल भेजना पड़ता है।
विज्ञापन

मनमानी रकम देने पर भी सुविधाएं नाकाफी
डीह के अभिभावक रामेश्वर यादव का कहना है कि प्राइवेट स्कूलों में बच्चों से मनमानी फीस वसूली जा रही है, वहीं कॉपी-किताबें भी काफी महंगी हैं। वाहन की व्यवस्था के नाम पर अच्छी रकम ली जाती है, लेकिन सुविधा के नाम पर खानापूर्ति होती है। स्कूल संचालकों के मनमाने रवैये पर कोई अंकुश नहीं लग रहा है।
पोर्टल पर ब्योरा अपलोड कराने में कर रहे सहयोग
स्कूलों में संचालित वाहनों के बारे में पूरा ब्योरा पोर्टल पर अपलोड कराने के लिए कहा गया है। यह काम परिवहन विभाग कर रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग भी इसमें पूरा सहयोग कर रहा है। परिषदीय विद्यालयों के पास कोई वाहन नहीं है, जिसके बारे में लिख कर दे दिया जाएगा। प्राइवेट स्कूलों से वाहन संबंधी सारा ब्योरा जुटाकर अपलोड करा रहे हैं। विद्यालयों में जागरूकता संबंधी कार्यक्रम निरंतर कराए जाते हैं। स्कूली वाहनों के चालकों-परिचालकों को भी जागरूक किया जाता है।
-राहुल सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
फिटनेस के लिए जाना पड़ता है दूसरे जनपद
वित्तविहीन विद्यालय संगठन के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि वाहनों के फिटनेस के लिए अपने जिले में कोई व्यवस्था नहीं है। यहां छह महीने से भी ज्यादा समय से फिटनेस सेंटर बंद हैं। ऐसे में फिटनेस के लिए उन्नाव, लखनऊ, फतेहपुर जाना पड़ता है, जहां सौतेला व्यवहार किया जाता है। इसमें समय बर्बाद होता है और धन भी अधिक खर्च करना पड़ता है।
संगठन के माध्यम से सभी स्कूलों को नियमों के अनुसार वाहन चलाने के लिए कहा जाता है। परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग से भी समन्वय बनाकर नियमों का पालन कराने में मदद की जाती है। जहां तक बात है नियमों की अनदेखी की तो जिन स्कूलों में वाहन व्यवस्था नहीं है, वहां अभिभावक स्वयं ही बच्चों को लाने व ले जाने के लिए वाहन लगा लेते हैं, जिनमें स्कूलों की कोई भूमिका नहीं होती है। कुछ मामलों में वाहनों को लेकर बेवजह स्कूल संचालकों को परेशान किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें