लालगंज के एक मोहल्ले में डेढ़ साल का मासूम स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया है। एसजीपीजीआई लखनऊ से आई जांच रिपोर्ट में वायरस की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
मासूम बच्चे के पिता में भी बीमारी के लक्षण पाए गए हैं। सीएमओ के निर्देश पर रैपिड रिस्पांस टीम ने गुरुवार को मोहल्ले में पहुंचकर परिवार के 22 लोगों को टैमी फ्लू दवा खिलाई।
इसके अलावा बीमारी से बचने के लिए भी लोगों को जागरूक किया। जनवरी से अब तक जिले में स्वाइन फ्लू के सात केस मिल चुके हैं। इसमें से एक रोगी की मौत भी हो चुकी है।
लालगंज के एक मोहल्ला निवासी युवक के डेढ़ साल के बच्चे को सात दिन पहले जुकाम-बुखार होने के बाद नगर के ही एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आशंका होने पर चिकित्सक ने एसजीपीजीआई सैंपल भेजकर स्वाइन फ्लू की जांच कराई।
11 मार्च को एसजीपीजीआई से आई जांच रिपोर्ट में मासूम में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। 12 मार्च को जानकारी होते ही सीएमओ के निर्देश पर रैपिड रिस्पांस टीम ने लालगंज पहुंचकर घर के 20 लोगों को टैमी फ्लू दवा खिलाई।
इसके अलावा बच्चे की तीमारदारी में जुटे मासूम के पिता में भी स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण मिलने पर जांच के लिए उन्हें रेफर किया गया है। मासूम का लालगंज में ही इलाज चल रहा है। उसकी सेहत में अब सुधार है।
नानी के घर मुंबई से लौटने के बाद बिगड़ी सेहत
मासूम अपनी मां व पिता के साथ मुंबई अपने ननिहाल गया था। पिछले सप्ताह वापस लौटने के बाद बच्चे की हालत खराब होने लगी तो उसे लालगंज के ही एक अस्पताल में चिकित्सक को दिखाकर इलाज शुरू कराया गया था। इलाज के बाद भी सुधार न होने पर एसजीपीजीआई लखनऊ से स्वाइन फ्लू की जांच कराई गई।
ऐसेे होता है स्वाइन फ्लू
यह रोग सूकरों से बढ़ता है। स्वाइन फ्लू इंफ्लूएंजा ए वायरस के एच-1 एन-1 के कारण होता है। यह संक्रामक रोग सांस के सहारे एक व्यक्ति से दूसरे में पहुंच जाता है। बीमारी से बचने के लिए रोगी के संपर्क से बचना जरूरी है।
बीमारी के लक्षण
स्वाइन फ्लू की चपेट में आने से रोगी में सुस्ती के साथ ही तेजी से बुखार आता है। खांसी के साथ ही सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। भूख नहीं लगती और गले में खरास के साथ ही उल्टी-दस्त के बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है। समय से इलाज शुरू न होने से रोगी की जान भी जा सकती है।