जुलूस अपने निर्धारित मार्गों से होता हुआ कर्बला मीर वजीर अली पहुंचा, जहां पर ताजिये दफन किए गए। इस दौरान मशहूर मातमी अंजुमन जैनुल एबा कदीम के नौहाख्वान नजमी जाफरी, जफर नसीराबादी, शान, हमजा, शादाब, रिजवान आदि ने सीनाजनी की।
जुलूस में डॉ. कुदसी रिजवी ने आतंकवाद की निंदा करते हुए अत्याचारी यजीद को सबसे पहला और बड़ा आतंकवादी बताया। कहा कि हजरत हुसैन ने आतंक के खिलाफ लड़ते हुए इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी जान दी।
जुल्म और आतंक के खिलाफ लड़ने वाले सच्चे अर्थों में हुसैनी है। ताजदा नकवी ने तकरीर में कुरान का सार पेश करते हुए कहा कि जिसने किसी बेगुनाह को कत्ल किया। उसने पूरी इंसानियत को कत्ल किया।
आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है। जुलूस में मजहर नकवी, सरफराज, रज्जन, जुल्फिकार नकवी, खुर्शीद अनवर आदि मौजूद रहे। फुरसतगंज प्रतिनिधि के अनुसार जायस कस्बे में चेहल्लुम का जुलूस निकला।
जुलूस इमामबाड़ा जामा मस्जिद से प्रारंभ होकर चौधराना, कंचाना, सैदाना, कंबाना, बस स्टेशन, नौगती होते हुए कर्बला में दफन हुआ। इस दौरान लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
हुसैनिया दरबारे हुसैनी मीर सज्जाद हुसैन के मुतवल्ली सैयद अलमदार नकवी ने पालिका चेयरमैन इलियास के साथ प्रशासन और पुलिस अफसरों के सहयोग पर आभार जताया। इस दौरान जुलूस में पुलिस मुस्तैद रही।