यूपी बोर्ड की कॉपियों के मूल्यांकन का कार्य बुधवार को अव्यवस्थाओं के बीच शुरू हो गया। पहले दिन 177 उप प्रधान परीक्षकों (डीएचई) में 33 नहीं आए। जबकि 1671 में 741 परीक्षक नहीं पहुंचे। पहले दिन औपचारिकता के रूप में 2880 उत्तर पुस्तिकाओं को जांचा गया।
बोर्ड की कॉपियों के मूल्यांकन के लिए शहर में चार मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं। चारों मूल्यांकन केंद्रों पर बुधवार सुबह से ही अफरातफरी का माहौल रहा। जिले में 6,18,897 लाख कॉपियां आ गई हैं। पहला दिन औपचारिकताएं पूरी करने में ही निपटा।
सभी प्रधान परीक्षकों को 20-20 कॉपियां जांचने के लिए दी गई। परीक्षकों की हाजिरी लेकर उन्हें वापस किया गया। किन्हीं कारणों से 33 उप प्रधान परीक्षक व 741 परीक्षक मूल्यांकन केंद्रों पर नहीं पहुंचे।
जीआईसी के उप प्रधानाचार्य आरपी श्रीवास्तव ने बताया कि पहले दिन 32 डीएचई व 300 परीक्षक आए। नियमानुसार पहले दिन डीएचई को 20-20 कॉपियां जांचने के लिए दी गई। गुरुवार से सभी परीक्षकों को कॉपियां जांचने के लिए दी जाएगी।
एनआईसी के प्रधानाचार्य रामानुज सिंह ने बताया कि 19 डीएचई व 184 परीक्षक आए। शेष परीक्षक गुरुवार से आ जाएंगे। पहले दिन डीएचई से 20-20 कॉपियां जंचवाई गई। एमजीआईसी प्रधानाचार्य राजेश त्रिवेदी ने बताया कि 25 डीएचई से 20-20 कॉपियां जंचवाई गई।
276 परीक्षकों ने भी उपस्थिति दर्ज कराई। जीजीआईसी की उप प्रधानाचार्या सबीहा खान ने बताया कि मूल्यांकन कार्य शुरू हो गया है। पहले दिन 38 प्रधान परीक्षक व 170 परीक्षक आए। मूल्यांकन शुरू हो गया है।
मूल्यांकन केंद्रों पर परीक्षकों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था पहले दिन नहीं की गई। बिजली की भी समस्या रही। बिजली कटौती के कारण परीक्षकों को परेशान होना पडे़ेगा। गुरुवार से परीक्षकों की संख्या बढ़ जाएगी। चूंकि बुधवार को पहला दिन था, इसलिए इसलिए औपचारिकताएं पूरी कराई गई।
31 मार्च से मूल्यांकन कार्य तेज हो जाएगा। लेकिन व्यवस्थाएं न होने के कारण परीक्षकों को परेशानी का सामना करना होगा। डीआईओएस डॉ. विनय मोहन ने बताया कि मूल्यांकन केंद्रों के प्रभारियों को बिजली, पानी व प्रसाधन कक्षों की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। पहले दिन आधे से अधिक डीएचई व परीक्षक आए। गुरुवार से मूल्यांकन कार्य सुचारु होगा।