जिला अस्पताल के नेत्र विभाग की ओटी में लगी फेको मशीन।
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रायबरेली। विश्व स्वास्थ्य दिवस पर जिला अस्पताल में आने वाले नेत्र रोगियों को बड़ी राहत मिली है। यहां अब मोतियाबिंद के ऑपरेशन चीरे की जगह फेको विधि से होंगे। मंगलवार को नेत्र विभाग के ऑपरेशन थिएटर में फेको मशीन को इंस्टाल कराया गया। इससे अब यहां बेहतर व सफल तरीके से मोतियाबिंद की सर्जरी होने से नेत्र रोगियों को दूसरे अस्पतालों की दौड़ लगाने की परेशानी से भी छुटकारा मिलेगा।
जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में मोतियाबिंद के मरीज भी आते हैं। कैंपों में चिह्नित मरीजों को भी यहां लाकर मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाता है। अब तक फेको मशीन न होने के कारण आंखों में चीरा लगाकर यह ऑपरेशन किया जाता था। ऐसे में ऑपरेशन की गुणवत्ता अच्छी नहीं होती थी।
सीएमएस डॉ. प्रदीप अग्रवाल के प्रयास से अस्पताल को अब फेको मशीन मिल गई। मंगलवार को मशीन को ओटी में स्थापित कर दिया गया। इससे अस्पताल में अब मोतियाबिंद के ऑपरेशन फेको विधि से हो सकेंगे।
सरकारी अस्पताल में लगी पहली फेको मशीन
जिले के निजी नेत्र चिकित्सालयों में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए अत्याधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जाता है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में फेको मशीन न होने के कारण चीरा लगाकर ही मोतियाबिंद के ऑपरेशन होते थे। सरकारी अस्पतालों में लगने वाली यह पहली फेको मशीन है।
नेत्र सर्जन डॉ. सुप्रभा त्रिपाठी का कहना है कि मोतियाबिंद के ऑपरेशन की इस विधि में आंख में महज 2.8 एमएम का एक बारीक छेद किया जाता है। इसके माध्यम से सफेद मोतिया को आंख के अंदर ही घोल दिया जाता है, जिसके बाद फोल्डेबल लेंस को आंख के अंदर प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।
नेत्र रोग विभाग के ऑपरेशन थिएटर में फेको मशीन स्थापित करा दी गई है। अब इस मशीन से ही मोतियाबिंद के ऑपरेशन कराए जाएंगे। अब तक निजी अस्पतालों में ही इस मशीन से ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध है।
डॉ. प्रदीप अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल