रायबरेली। जिले में गांवों में खेतों में बारिश में जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए 190 से ज्यादा ड्रेनों की सफाई में जमकर धन कर बंदरबांट किया गया है। यही वजह है कि इस बार बारिश हुई तो करीब 650 गांव के लोग जलभराव की समस्या की समस्या से जूझेंगे।
जिले की ड्रेनों की रखरखाव का काम सिंचाई खंड दो प्रतापगढ़ के पास है। यहां पर सब डिवीजन दफ्तर बनाया गया है, लेकिन यहां से अभियंता व कर्मचारी गायब रहते हैं।
यही वजह है कि ज्यादातर ड्रेनों की साफ-सफाई केवल कागजों पर ही हो जाती है। इस साल कितने किलोमीटर ड्रेन की सफाई हुई है और कितना धन खर्च किया गया। इस बारे में अधिशासी अभियंता भी नहीं बता पाए।
बरसात में जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए जिले में 190 से ज्यादा ड्रेन हैं। इनका मकसद यह है कि बरसात होने पर गांवों और खेतों का पानी ड्रेनों से होते हुए नदी में चला जाए।
इन ड्रेनों के रखरखाव और साफ-सफाई के लिए बजट तो आता है, लेकिन सफाई कहा होती है। इसका कुछ अता पता नहीं है। इस साल उत्तरपारा, कोटवा मोहम्मदाबाद, हरियावां, अटौरा, थौरी, धमौली, कठघर, अंबार, दौतरा, हाजीपुर, खुर्दाताल, मवईया, गोडवाहसनपुर समेत अन्य ड्रेनों की तो सफाई कराई गई, लेकिन अभी भी ड्रेन झाड़ियों से पटी हुई है।
यही वजह है कि हर साल बारिश में ग्रामीणों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है। कई जगह ज्यादा दिनों तक पानी भरा रहता खेतों में बोई फसल भी खराब हो जाती है।
यही नहीं शहर के इंदिरा नगर में सिंचाई खंड दो प्रतापगढ़ का सब डिवीजन दफ्तर खुला है। दफ्तर के साथ बड़े-बड़े घूर लगे है। अंदर का नजारा किसी भूत बंगले से कम नहीं है। दफ्तर की बिजली बकाया होने के कारण कई महीनों से कटा हुआ है। कहने को यहां दो सहायक अभियंताओं की तैनाती है, लेकिन वह कभी कभार ही आते हैं।
सहायक अभियंताओं से पूछकर बताएंगे प्रगति
सिंचाई खंड दो के अंतर्गत रायबरेली जिले में 190 से ज्यादा हैं। ड्रेन की सफाई में कोई मनमानी नहीं हुई है। लेकिन कौन सी ड्रेन की सफाई हुई है और कितना बजट खर्च हुआ है। इसकी जानकारी सहायक अभियंताओं से पूछकर ही बताएंगे।
-एमपी सिंह अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड दो प्रतापगढ़