बेसिक शिक्षा विभाग से संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूलों में संविदा पदों की भर्ती में खेल उजागर हुआ है। वर्ष 2011 में चयनित होने के बाद रसोइये का काम कर रहीं महिला कर्मियों को भी बुलावा पत्र भेज दिया है, जबकि नौकरी कर रहीं रसोइयों ने दोबारा आवेदन ही नहीं किया है। बीएसए मामले की पड़ताल कराने में जुट गए हैं।
एक जनवरी 2014 को विज्ञप्ति जारी करके कस्तूरबा स्कूलों में भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए थे, लेकिन आवेदन कम आने के कारण भर्ती नहीं हो सकी थी। इसके बाद 10 अगस्त 2014 को दोबारा विज्ञप्ति जारी करके आवेदन मांगे गए थे।
दो बार में 114 लोगों ने आवेदन किया था। नियमानुसार एक पद के लिए कम से कम पांच आवेदन होने चाहिए, लेकिन 48 पदों के लिए मात्र 114 आवेदन ही आए थे।
विज्ञप्ति जारी होने के 11 महीने बाद अब इंटरव्यू करके भर्ती प्रक्रिया को पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है। इंटरव्यू के लिए भेजे गए बुलावा पत्र में जमकर खेल किया गया है। जिन लोगों ने आवेदन नहीं किया।
उन्हें भी बुलावा पत्र भेज दिया गया। खास बात यह कि वर्ष 2011 में चयन के बाद रसोइये का काम करने वाली उर्मिला देवी, अंजू, शीला, रीता सहित करीब सात रसोइयों को बुलावा पत्र भेजा गया है।
ये रसोइया वर्तमान समय में कस्तूरबा स्कूलों में नौकरी कर रही हैं।