रायबरेली। जिले में विधानसभा चुनाव के टिकट को लेकर चल रही उठापठक के बीच भाजपा ने कांग्रेस के दो बागियों पर दांव लगाया है।
बाहुबली विधायक रहे अखिलेश सिंह की बेटी अदिति सिंह को सदर, जबकि एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह के भाई राकेश सिंह को हरचंदपुर सीट से उतारा है।
इन दोनों उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से कांग्रेस के गढ़ में सियासी समीकरण बदल गए हैं। हालांकि नतीजे बताएंगे कि कांग्रेस के ये बागी इन सीटों पर भाजपा को कितना फायदा पहुंचा सकते हैं।
हरचंदपुर से भाजपा कभी खाता नहीं खोल पाई, जबकि सदर सीट पर काफी समय से एक ही परिवार का कब्जा है। ऐसे में दोनों सीटों पर कमल खिलाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
साल 2017 में पूर्व बाहुबली और लगातार पांच बार विधायक रहे अखिलेश सिंह ने अपनी विरासत बेटी अदिति सिंह को सौंप दी। अखिलेश सिंह की सरपरस्ती में अदिति कांग्रेस के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ीं और रिकॉर्ड मतों से विधायक बनीं।
यही हाल हरचंदपुर सीट से कांग्रेस से विधायक बने राकेश सिंह का रहा। वह भी पहली बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और विधायक बने। राकेश को जिताने के लिए एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने पूरी ताकत झोंकी और राकेश सिंह को विधायक बनवा दिया।
आश्चर्यजनक पहलू यह है कि चाहे अखिलेश सिंह का परिवार रहा हो या फिर एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह, सभी को कांग्रेस ने बुलंदियों तक पहुंचाया, लेकिन धीरे-धीरे इन परिवारों की दूरी कांग्रेस से बढ़ती गई।
पहले एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने भाजपा का दामन थामा। अब हाल ही में पहले अदिति सिंह ने लखनऊ में और फिर पिछले महीने यहां आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने राकेश सिंह भी भगवा रंग में रंग गए। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के कुछ दिनों बाद से ही दोनों अक्सर यूपी सरकार के समर्थन में बयान देते रहे।
नाराजगी पड़ेगी झेलनी
सदर और हरचंदपुर सीट से भाजपा का टिकट हासिल करके अदिति सिंह और राकेश सिंह ने मैदान तो मार लिया है, लेकिन इनको उन लोगों की नाराजगी भी झेलनी पड़ेगी, जो लोग लंबे समय से भाजपा में रहते हुए टिकट मांग रहे थे। नाराजगी इस बात की है कि भाजपा में और गांव-गांव घूमने वालों को टिकट नहीं मिला और कांग्रेस से आए उम्मीदवारों को बड़ी आसानी से टिकट दे दिया गया। अब यह देखना है कि उम्मीदवार के साथ भाजपा किस तरह से लोगों की नाराजगी दूर करती है।