मोर के शवों को कब्जे में लेते वन कर्मी व पुलिस।
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खीरों (रायबरेली)। प्रतिबंध के बावजूद थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय पक्षी मोर का शिकार बेखौफ तरीके से हो रहा है। इसके लिए मोर को जहरयुक्त दाना खाने को दिया जाता है। इसका खुलासा निहस्था गांव के पास मिले मोर के शव से हुआ।
मोर के शव के आसपास जहर युक्त गेहूं बिखरा पाया गया। सूचना के बाद पहुंची वन विभाग और पुलिस की टीम ने मोर के शव को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। रिपोर्ट में मोर की मौत जहर खाने से होने की पुष्टि हुई है। पुलिस ने शिकारियों की धरपकड़ को अलग अलग टीम गठित कर कार्रवाई शुरू की है।
निहस्था रेलवे हाल्ट के पास एक तालाब किनारे झाड़ियों में कई मोर निवास करते हैं। बीते कुछ दिनों से इनकी संख्या में लगातार कमी होती देखी गयी। शनिवार सुबह कुछ ग्रामीणों ने तालाब किनारे झाड़ियों में एक मोर का शव देखा।
सूचना पर पहुंची पुलिस व वन विभाग के कर्मचारियों को आसपास कई मृत मोर के अवशेष मिले, जो कई दिनों पुराने थे। पुलिस व वन विभाग की टीम ने शव के साथ ही अवशेषों को एकत्र कर पोस्टमार्टम करा पूरे राजकीय सम्मान के साथ मोर के शव व अवशेषों का अंतिम संस्कार कराया।
ग्राम प्रधान नेहा सिंह व ग्रामीणों का कहना है कि अक्सर कुछ बाहरी अज्ञात लोग इस तालाब के आसपास घूमते दिखते थे। बगल में रेलवे स्टेशन होने के कारण लोग उन्हें यात्री समझकर शंका नहीं कर पाए।
आशंका है कि इन्ही अज्ञात लोगों ने मोर के पंख व मांस की तस्करी करने को अनाज या अन्य खाने की वस्तुओं में विषैला पदार्थ खिलाकर इनका शिकार किया है।
प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. नवल किशोर ने बताया मोर की मौत विषैला पदार्थ खाने से हुई है। अवशेषों में भी विषैला पदार्थ पाया गया है। प्रभारी निरीक्षक बृजमोहन ने बताया कि राष्ट्रीय पक्षी मोर का शव रेलवे लाइन से कुछ दूर पर मिला है। शिकारियों की धरपकड़ को पुलिस व वन विभाग की टीमें गठित कर कार्रवाई शुरू की गयी है।