19 मार्च 2011 को साकेत नगर मोहल्ले में आठ वर्षीय की बालिका के साथ मुंह में बोरा ठूंसकर हुए दुष्कर्म के विरोध में आंदोलन करने वाली डिम्पी तिवारी ने गांव-गांव जाकर लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए बॉक्सिंग व मार्शल आर्ट सिखायी और उन्हें राज्यस्तरीय व नेशनल प्रतियोगिताओं तक भी पहुंचाया।
वह छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ उन्हें गेम भी सिखाती है। डिंपी ने अपनी लगन के दम पर कराटे की एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया।
उनके पिता सूर्य प्रकाश तिवारी की मौत छह वर्ष पहले हो गई थी। मां गीता देवी बालिका विद्या मंदिर में आया का काम करती हैं। डिंपी ने कड़ी मेहनत करके अपनी दो बहनों का विवाह भी कर दिया है।
डिंपी का नाम रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार में चयन होने से मार्शल आर्ट एसोसिएशन के सचिव अताउर रहमान, अरुण कुमार सिंह, समाज सेवी सुरेश कुमार दीक्षित, प्रशांत शुक्ला समेत तमाम खिलाड़ियों ने खुशी जताई है।