रायबरेली। फिरोज गांधी महाविद्यालय में मिशन शक्ति के तहत शनिवार को महिलाओं एवं बच्चों की तस्करी, बालश्रम और जबरन भिक्षावृत्ति विषय पर संगोष्ठी हुई। प्राचार्य डॉ. हरीशचंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि आज हम 21वीं सदी में प्रवेश करके स्वयं को सभ्य और सुसंस्कृत होने का दंभ भरते हैं, लेकिन दुर्भाग्य है कि तमाम सामाजिक बुराइयों एवं विकृतियों पर हमें चर्चा करनी पड़ती है। जागरूकता से ही यह विसंगतियां दूर होंगी।
मुख्य वक्ता समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. यूबी सिंह ने बाल श्रम, वेश्यावृत्ति एवं तस्करी के आंकड़ों का जिक्र किया। कहा, देह व्यापार रोकने की योजना, पीड़ित की रक्षा करना एवं देह व्यापार करने वाले संगठन तक पहुंच कर उनको दंडित करना जैसे उद्देश्य के साथ ऐसी घिनौनी समस्या को समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. किरन श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाएं एवं बच्चे सुदृढ़ देश के आधार स्तंभ है, इसलिए उनकी रक्षा करने की जिम्मेदारी सरकार एवं समाज दोनों की है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. अजय सिंह चौहान ने कहा कि मानव तस्करी विशेष रूप से बाल एवं महिला तस्करी आज विश्व के तीसरे नंबर का आपराधिक उद्योग बन गया है। संगोष्ठी में डॉ. बीडी मिश्र, डॉ. आजेंद्र प्रताप सिंह व डॉ. अमिष प्रताप सिंह आदि उपस्थित रहे।