जिस उम्र में बच्चे खेल खिलौनों के लिए जिद करते हैं या अपनी नादानियों से अभिभावकों को परेशान करते हैं, उस उम्र में जिले के नन्हे आयुष्मान ने अपनी याददाश्त की बदौलत लोगों को हैरत में डाल रखा है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथों सम्मानित होने के बाद अमर उजाला कार्यालय आए नन्हे आयुष्मान ने बातचीत के दौरान अपने बालसुलभ ढंग से बताया कि वह बहुत बड़ा आदमी बनना चाहता है और बहुत सारी किताबें पढ़ना चाहता है। उसके साथ आए उसके मां और पिता ने उसके सपनों को पूरा करने की बात कही।
अद्भुत प्रतिभा के धनी आयुष्मान की उम्र महज साढ़े तीन साल है। पर उसकी याददाश्त इतनी तेज है कि उसे आज विश्व के तकरीबन सभी देशों के राष्ट्रपतियों व राजधानियों के नाम जबानी याद हैं। यही नहीं उसे उस समय की बातें भी याद हैं, जिसे उसने उस आयु में देखा सुना था, जब आम लोग बच्चे को नासमझ मानते हैं। उनके मां की मानें तो आयुष्मान ने दो साल की उम्र में अपनी प्रतिभा का परिचय देना शुरू कर दिया था। वह बचपन से ही आम बालकों से हटकर था।
मां के मुताबिक जब वह महज दो साल का था, तब उसने अचानक रास्ते में एक दुकान की ओर इशारा करते हुए कहा था कि मम्मी आप ने इस दुकान से एक दिन खरीदारी की थी। मां के मुताबिक उन्होंने यह खरीदारी छह महीने पहले की थी। इसके बाद ही उन्हें अनुभव हुआ कि इसकी याददाश्त काफी तेज है। परीक्षण के लिए उन्होंने दो-तीन दिन बाद कई देशों की राजधानियों के नाम जबानी बताए। दूसरे दिन जब उससे पूछा गया तो आयुष्मान ने सभी के उत्तर सही-सही दिए।
इसके बाद सरोज ने उसे और भी चीजे सामान्य ज्ञान की बातें सिखाना शुरू कर दिया। आज उसे विश्व के तकरीबन सभी देशों के राष्ट्रपति या राजधानियों के नाम याद हैं। पिता अजय बाजपेयी ने बताया कि आयुष्मान बिना नहाए और पूजा किए कोई भी चीज नहीं खाता। यही नहीं उठने के बाद गायत्री मंत्र समेत कई मंत्रों का जाप भी करता है। उसकी दिनचर्या की शुरुआत माता-पिता के चरणस्पर्श से होती है।
प्रतिभाशाली आयुष्मान को काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी उत्तर प्रदेश की ओर वर्ष 2013-14 साइंस अवार्ड्स के तहत बाल वैज्ञानिक अवार्ड के लिए चयनित किया गया।
23 जुलाई को मुख्यमंत्री ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। बेहद साधारण परिवार से जुड़े आयुष्मान के पिता खेती करते हैं। वहीं मां प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका है। पोते के सम्मानित होने पर बाबा भगवती प्रसाद वाजपेयी और दादी लल्ली वाजपेयी काफी खुश हैं। कहते है कि पोते ने तो कमाल कर दिया। हम ही नहीं पूरे जिले में उसका नाम हो गया। डॉक्टर बीरबल ने बताया कि ऐसे एक्ट्राब्रिलिएंसी के मामले बहुत ही कम देखने को मिलते हैं।
दो ब्रिलियंट क्रोमोसोम के जैनेटिक क्रिएसशन से सुपर क्रोमोसोम बन जाता है। यही सुपर क्रोमोसोम बच्चे को ब्रिलियंट बनाता है। इसमें आयु बाधक नहीं होती है। ऐसा तभी होता है, जब माता पिता दोनों की याददाश्त तेज होती है। इसमें वातावरण का भी काफी कुछ प्रभाव होता है। आयुष्मान के साथ ऐसा भी कुछ भी है।