महराजगंज (रायबरेली)। कहते हैं कि प्रतिभा किसी सुविधा का मोहताज नहीं होती। सर से पिता का साया उठ जाने के बाद भी बेटी ने हिम्मत नहीं हारी और लक्ष्य हासिल करने के लिए दिन रात मेहनत की। उसने न तो किसी कोचिंग का सहारा लिया, न ही किसी इंस्टीट्यूट में पढ़ने गई, बल्कि दिन-रात खुद मेहनत करके पहले ही प्रयास में सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता अर्जित की। अंजलि ने देश की सर्वाधिक प्रतिष्ठित अखिल भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा में चयनित होकर न केवल अपने दिवंगत पिता के सपनों को साकार किया, बल्कि अपनी मां और परिवारीजनों का नाम रोशन किया है। जिले का गौरव भी बढ़ाया है। उसके घर बधाई देने वालों का तांता लगा है।
सोमवार को सुबह अखिल भारतीय सिविल सेवा का परिणाम आया। इसमें हरचंदपुर क्षेत्र के मीर का पुरवा मजरे सराय के रहने वाले स्व. अनिल प्रताप सिंह की बेटी अंजलि ने सफलता हासिल की है। अनिल प्रताप उत्तर प्रदेश पुलिस में मुख्य आरक्षी के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2019 में सड़क दुर्घटना के दौरान उनकी मौत हो गई थी। बाद में उनकी पत्नी गीता देवी अपने दो बच्चों आदित्य प्रताप सिंह और अंजली वर्मा उर्फ साक्षी को लेकर असनी गांव में रहने लगीं। असनी उनके पिता का गांव है। दोनों बच्चे यहीं रहकर पढ़ने लगे। दोनों ही पढ़ने-लिखने में काफी कुशाग्र बुद्धि के हैं।
अंजली वर्मा ने डॉ. राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय से ला ग्रेजुएट की डिग्री हासिल की है। उन्होंने अपने पिता अनिल प्रताप सिंह के सपनों को साकार करने के लिए भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा पास करने का संकल्प लिया। उन्होंने न तो कोई कोचिंग ज्वॉइन की और न ही किसी अन्य इंस्टीट्यूट में प्रवेश लिया। इसके बावजूद अंजलि ने पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा में 577वी रैंक हासिल कर ली है। आज परीक्षाफल घोषित हुआ तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनके इस चयन पर उनकी मां गीता वर्मा, यहां असनी में रहने वाले उनके मामा प्रदीप कुमार चौधरी, दिलीप कुमार चौधरी आदि ने खुशी जताई है। अंजली वर्मा अभी भी अपनी इस सफलता से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उसका कहना है कि वह मुख्य रूप से भारतीय प्रशासनिक सेवा में आकर आम जनता और देश की सेवा करना चाहती हैं। इसके लिए वह प्रयास जारी रखेगी।