रायबरेली। खीरों क्षेत्र के शंकर बक्शखेड़ा मजरे सगुनी की पूनम शुक्रवार को प्रसव पीड़ा से करीब ढाई घंटे तक कराहती रही। काफी इंतजार के बाद भी एंबुलेंस की सुविधा न मिलने के बाद पति रावेंद्र उसे बाइक से ही लेकर जिला अस्पताल के लिए चल पड़ा। रास्ते में लालपुर गांव के पास प्रसव पीड़ा बढ़ने के बाद महिलाओं से सड़क के किनारे ही धोती लगाकर किसी तरह प्रसव कराया। जच्चा-बच्चा स्वस्थ बताए जा रहे हैं।
क्षेत्र के शंकर बख्शखेड़ा गांव निवासी पूनम पत्नी रावेंद्र गौतम को शुक्रवार को प्रसव पीड़ा हुई तो पति उसे सीएचसी खीरों लेकर पहुंचा, लेकिन कोरोना संक्रमित कई मरीजों के मिलने के कारण सीएचसी के सील होने के बाद उसे भर्ती नहीं किया गया। जिला अस्पताल ले जाने के लिए पति ने 102, 108 व 112 नंबर पर कई बार फोन करके एंबुलेंस की मांग की। वह ढाई घंटे तक एंबुलेंस आने का इंतजार करता रहा, लेकिन कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची।
पत्नी को दर्द बढ़ने पर रावेंद्र बाइक से ही पत्नी को जिला अस्पताल के लिए निकल पड़ा। सीएचसी से करीब दो किलोमीटर दूर खीरों रायबरेली मार्ग पर लालपुर गांव के पास स्थित पेट्रोल पंप के पास पूनम को तेज दर्द शुरू हो गया। इसके बाद पति रावेंद्र ने आसपास के घरों में मौजूद महिलाओं को बुलाया। महिलाओं ने चारों तरफ साड़ी का घेरा बनाकर सड़क के किनारे महिला को प्रसव कराया। पूनम ने सड़क के किनारे बेटे को जन्म दिया।
बेटे के जन्म के बाद जच्चा-बच्चा सुरक्षित होने पर पति रावेंद्र गौतम ने प्रसव में सहयोग करने वाली महिलाओं को धन्यवाद दिया। प्रभारी निरीक्षक खीरों राजेश सिंह ने बताया कि डायल 112 पर कोई भी सूचना दी जा सकती है, लेकिन कंट्रोल रूम द्वारा उक्त सूचना पुलिस के स्थान पर संबंधित विभाग को स्थानांतरित कर दीं जाती है। एंबुलेंस न पहुंचने की जिम्मेदारी पुलिस के बजाय स्वास्थ्य विभाग की है। यदि महिला व बच्चे को जन्म के बाद का टीका नही लगा हो तो जच्चा व बच्चा को लालगंज भेजकर टीकाकरण करवाने की व्यवस्था खीरों पुलिस करेगी।