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छात्राओं को नसीहत, शोहदा परेशान करें तो थाने पर जाकर उसका स्केच बनवाएं, पुलिस करेगी कार्रवाई

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पुलिस की पाठशाला में मौजूद छात्राएं। - फोटो : RAIBARAILY
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डलमऊ (रायबरेली)। घबराएं नहीं, हमेशा उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाएं। आपकी चुप्पी किसी को भी दोबारा गुनाह के लिए प्रेरित कर सकती है। इसलिए हमेशा हिम्मत से काम लें। आपको कोई शोहदा परेशान करें तो पुलिस से संपर्क कर उसका हुलिया बताकर स्केच बनाएं। ऐसे में कार्रवाई करने में आसानी होगी।
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उत्पीड़न व अत्याचार के खिलाफ छात्राओं को खड़े होने की यह सीख मिशन शक्ति की नोडल अधिकारी एवं विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फील्ड यूनिट) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रतिभा त्रिपाठी ने दी। वह अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से गुरुवार को शांति मनोहर इंटर कॉलेज, मुराईबाग में आयोजित पुलिस की पाठशाला में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहीं थीं। इस मौके पर छात्र-छात्राओं को यातायात नियम बताने के साथ ही महिलाओं-बालिकाओं की सुरक्षा के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रतिभा त्रिपाठी ने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं को घबराने की जरूरत नहीं है। बताया कि यदि किसी छात्रा को कोई शोहदा विद्यालय आते-जाते समय परेशान करता है तो चुप रहने के बजाए उसके खिलाफ शिकायत करें। स्कूल और घर में जानकारी दें, कोई हल न निकले तो पुलिस की मदद लें। अब तो जिले में किसी का हुलिया बताकर उसका स्केच बनवाने की सुविधा उपलब्ध हो गई है।
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ऐसे में शोहदे या अराजकतत्व की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई करने में आसानी होगी। बताया कि सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबरों की व्यवस्था की गई है। शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई की जाती है। बालिकाएं अपने पास हेल्पलाइन नंबर, नजदीकी पुलिस स्टेशन के सीयूजी नंबर लिखकर रखें। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वाहन चलाते समय यातायात नियमों का पालन हमेशा करें। अपने परिवारीजनों व दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें।
पुलिस की पाठशाला में कुछ छात्राओं ने उन्हें अपनी समस्या भी बताईं, जिस पर पुलिस ने निराकरण कराने का भरोसा दिया। कोतवाल लालचंद्र सरोज, कॉलेज प्रबंधक संदीप चौधरी और प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह ने कहा कि छात्र-छात्राएं ही देश का भविष्य हैं। वह यातायात नियमों का पालन करें। अपने साथ हो रहे जुल्म को दबाने के बजाय उसे जोरदारी के साथ उठाएं।
शिकायत करें, तुरंत होगी कार्रवाई
बालिकाओं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर की सुविधा दी गई है। साथ ही नजदीकी थाने के सीयूजी नंबर पर भी शिकायत की जा सकती है। शिकायत होते ही तुरंत कार्रवाई की जाती है। अराजक तत्वों और शोहदों की हरकतों पर अंकुश लगाने के लिए उनके खिलाफ आवाज उठानी जरूरी है। चुप्पी साध लेने से ऐसे तत्वों के हौसले बुलंद होते हैं और आए दिन परेशान करते रहते हैं।
-लालचंद्र सरोज, कोतवाल
जागरूकता के लिए हो रहा बेहतर प्रयास
महिला सशक्तीकरण की बात हो या फिर यातायात नियमों का पालन करना हो, इसके लिए जागरूकता जरूरी है। जागरूकता के लिए इस तरह का कार्यक्रम सराहनीय पहल है। इससे छात्र-छात्राएं जागरूक होते हैं। अपनी बात खुलकर रखने का अवसर भी मिलता है।
-संदीप चौधरी, प्रबंधक।
निडर और साहसी बनें छात्राएं
सभी छात्राएं निडर और साहसी बनें। किसी भी परिस्थिति में घबराएं नहीं, बल्कि उसका मुकाबला करने की कोशिश करें। विद्यालय आते समय या घर लौटते समय कोई परेशान करता हो तो उसके बारे में जानकारी जरूर दें, ताकि उसका समाधान किया जा सके।
-राजेंद्र सिंह, प्रधानाचार्य
छुट्टी होने पर लगता रहता है जाम
छात्रा नैनसी और पल्लवी पाल का कहना है कि मुराईबाग चौराहे के नजदीक तीन विद्यालय हैं, जहां छुट्टी होने पर अक्सर जाम लगता रहता है। इससे छात्र-छात्राओं को ज्यादा दिक्कत होती है। विद्यालयों में छुट्टी के समय मुराईबाग के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता किए जाने की जरूरत है।
वाहन चलाते समय लगाए हेलमेट और सीट बेल्ट
छात्रा सुष्मिता और पूजा ने कहा कि यातायात नियमों का पालन जरूरी है। बाइक चलाते समय हेलमेट और कार सवार लोगों को सीट बेल्ट का प्रयोग करना चाहिए। यातायात नियमों का पालन करने से ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। इसके लिए सभी को जागरूक होना जरूरी है।
अपनी सुरक्षा के लिए रहें सतर्क, बनें निडर
छात्रा शिवानी और मुस्कान ने कहा कि छात्राओं को अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना चाहिए। अगर कभी कोई विषम परिस्थिति आए तो उससे घबराएं नहीं। हेल्पलाइन नंबरों और पुलिस के सीयूजी नंबरों को अपने पास रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर शिकायत करके शोहदों पर कार्रवाई कराई जा सके।
जागरूक बनें, दूसरों को भी दें जानकारी
छात्रा सुभाषिनी और संजना ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों में मिली जानकारी से जागरूकता आती है। खुद जागरूक बनने के साथ ही दूसरों को भी जानकारी देने का प्रयास करें, ताकि अपने घर और आसपास के लोग जागरूक हो सकें। ऐसा करके ही हर व्यक्ति को जागरूक किया जा सकता है।
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