रायबरेली। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं में निखार लाने के लिए बनवाए गए मिनी स्टेडियम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए हैं। मरम्मत के लिए मिले 91.90 लाख रुपयों का वारा-न्यारा कर दिया गया है। अधिकारियों ने स्टेडियमों को चेक किया तो कहीं मैदान ऊबड़-खाबड़ मिला तो कहीं फील्ड में ही मानकों को ताक पर रखकर नालियां बनवा दी गईं।
कार्यदायी संस्था ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने खर्च का ब्योरा भी नहीं दिया है। समीक्षा में मामला पकड़ में आने के बाद डीएम ने आरईडी के अधिशासी अभियंता का अग्रिम आदेशों तक वेतन रोक दिया है। जिले के सलेथू, बिसुनपुर, सलोन देहात और निहस्था में मिनी स्टेडियम बनवाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छुपी खेल प्रतिभाओं में निखार लाने के लिए यह काम कराया गया, लेकिन शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।
शासन ने 30 जून 2018 को चारो स्टेडियमों के मरम्मत के लिए 91.90 लाख रुपये कार्यदायी संस्था ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) को दिए थे। एक जनवरी 2019 को शत प्रतिशत काम पूरा किया जाना था, लेकिन मार्च 2019 में मंडलीय टीम ने स्टेडियमों की जांच तो मनमानी पकड़ में आ गई। शासन ने 15 अप्रैल तक काम को ठीक कराने के आदेश दिए गए थे। ठीक न कराने पर एफआईआर के आदेश भी दिए गए थे।
मामले में प्रांतीय रक्षक दल, विकास दल एवं युवा कल्याण विभाग की उपनिदेशक शिल्पी पांडेय ने जिले स्तर पर जांच कराकर जवाब देने के आदेश दिए थे। डीएम के आदेश पर पहले जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी एमएल रमन, लोकनिर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सीपी गुप्ता, आशुतोष उपाध्याय आदि की टीम ने जांच की।
इसके बाद डीडीओ एके वैश्य व अन्य अधिकारियों की टीम ने जांच की तो स्टेडियमों में मैदान ऊबड़-खाबड़ मिले। कई स्टेडियमों में अन्य काम भी ठीक नहीं पाया गया। आरईडी ने अब तक खर्च का ब्योरा तक नहीं दिया है। डीएम को समीक्षा में मनमानी मिली तो उन्होंने आरईडी के अधिशासी अभियंता का वेतन रोक दिया है।
जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी एमएल रमन ने बताया कि जिले के चारों मिनी स्टेडियमों के मरम्मत के लिए 91.90 लाख रुपये ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को दिए गए थे, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं कराया गया है। सभी स्टेडियम अधूरे पड़े हैं। आरईडी कार्यों के संबंध में जवाब भी नहीं दे रहा है। मामले में डीएम ने अधिशासी अभियंता का वेतन रोका है। शासन ने मामले में रिपोर्ट मांगी है।