यूरिन नली की सर्जरी कर मरीज की बचाई जान
एम्स के यूरोलॉजी विभाग के यूरोलॉजिस्ट डॉ. अमित मिश्रा की टीम ने यूरिन नली का सफल ऑपरेशन किया। यूरिन नली में समस्या से परेशान मरीज ने कई अस्पतालों के चक्कर लगाए। कहीं लाभ न मिलने के बाद एम्स पहुंचा। ऑपरेशन के बाद उसकी समस्या दूर हो गई है। ऑपरेशन के बाद वह पूरी तरह से स्वस्थ है।
पित्त की थैली से निकाली 18 एमएम की पथरी
एम्स में पित्त की थैली का पहला सफल ऑपरेशन डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने किया। बिना चीरा लगाए ही सर्जरी के दौरान महिला की पित्त की थैली से 18 एमएम से अधिक वजन के स्टोन को बाहर किया गया। ऑपरेशन के बाद महिला स्वस्थ है। उसे अस्पताल से डिस्चार्ज भी कर दिया गया है। दूरबीन विधि से ऑपरेशन करके स्टोन को बाहर किया गया।
रायबरेली। गंभीर बीमारियों की सर्जरी और इलाज के लिए बड़े शहरों के चक्कर लगाने वाले मरीजों को राहत मिल गई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के नौ विभागों ने सर्जरी शुरू कर दी है। मई में न्यूरो सर्जरी, यूरोलॉजी, जनरल सर्जरी विभाग में सबसे गंभीर मरीजों के ऑपरेशन हुए।
वैसे तो अब तक 273 मरीजों के ऑपरेशन किए गए हैं, लेकिन अप्रैल व मई माह में 177 ऑपरेशन हुए। लगातार सर्जरी के केस बढ़ने से मरीजों बड़ी सहूलियतें मिलनी शुरू हो गईं हैं।
एम्स में वैसे तो ओपीडी अगस्त 2018 से शुरू हो गई थी, लेकिन अधिशासी निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी के प्रयास से नौ जून 2021 से मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था की गई। पिछले अक्तूबर माह से मरीजों की सर्जरी के लिए ऑपरेशन थियेटर ने काम करना शुरू किया।
शुरू के चार महीनों में सर्जरी की संख्या काफी कम रही, लेकिन धीरे-धीरे संसाधनों के बढ़ने के साथ ही सर्जरी की संख्या भी बढ़ गई। पिछले अप्रैल माह में 89 तो मई माह में 88 मरीजों की सर्जरी करके उन्हें जीवनदान दिया गया।
मई माह में न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी, जनरल सर्जरी, डेंटल, आर्थो, पीडियाट्रिक, ईएनटी, गायनी और नेत्र विभाग में सर्जरी की गई। जून में सर्जरी की संख्या 100 के पार करने की तैयारी है। कई और विभागों में भी सर्जरी शुरू होने की उम्मीद है।
पौने चार साल में 3.46 लाख मरीजों को परामर्श
एम्स में 13 अगस्त 2018 से शुरू हुई ओपीडी में विभागों की संख्या बढ़ने के साथ ही अब तक 3.46 लाख से अधिक मरीज चिकित्सीय सलाह लेने के लिए यहां आ चुके हैं। जिले के साथ ही सुल्तानपुर, अमेठी, प्रयागराज, प्रतापगढ़, फतेहपुर, उन्नाव आदि जिलों के मरीज यहां इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद काउंटर भी बढ़ा दिए गए हैं।