जिला अस्पताल में बाहर की दवा की लिखी गई पर्ची।
रायबरेली। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बाहर से मंगवाए गए महंगे इंजेक्शन पकड़े जाने का असर नहीं पड़ा है। रविवार को अपर निदेशक ने भारी मात्रा में इंजेक्शन बरामद किए, लेकिन सोमवार को ओपीडी में मरीजों को धड़ल्ले से बाहर की दवाएं लिखी गईं। डॉक्टरों व दवा कारोबारियों के गठजोड़ के आगे अस्पताल प्रशासन नतमस्तक दिखा। मरीजों को करीब तीन लाख रुपये की दवाएं बाजार से खरीदरी पड़ीं।
अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जीपी गुप्ता ने गत रविवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी के डस्टबिन से बाजार के इंजेक्शनों की शीशियां बरामद की थी। उन्होंने मरीजों के पास से महंगे इंजेक्शन भी पकड़े। मामले में शासन को रिपोर्ट करने के साथ ही मरीजों को बाजार की दवाएं व इंजेक्शन न लिखने के आदेश दिए।
अपर निदेशक के आदेश के बाद भी सोमवार को ओपीडी में सुबह से ही मरीजों को बाजार से खरीदने के लिए दवाएं लिखी गईं। सभी विभागों के डॉक्टरों ने मरीजों को बाजार की दवाओं की पर्चियां थमाई। किसी के चेहरे पर कार्रवाई का खौफ नजर नहीं आया। जिला अस्पताल में लंबे समय से डॉक्टरों व दवा कारोबारियों का गठजोड़ चल रहा है। इसे रोक पाने में अधिकारी पूरी तरह से नाकाम हैं।
ओपीडी में पहुंचे 2000 रोगी, लगी लाइन
छुट्टी के बाद सोमवार को खुली जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। अस्पताल के सभी काउंटरों के साथ ही ओपीडी कक्षों के बाहर भी लंबी लाइन लग गई। मरीजों को टिनशेड के बाहर खडे़ होकर दवा लेनी पड़ी। परचा बनवाने के लिए भी मरीजों को पसीना बहाना पड़ा। ओपीडी में करीब 2000 मरीज चिकित्सीय सलाह लेने के लिए पहुंचे। इसमें जुकाम, बुखार, खासी के 600 से अधिक मरीज रहे। मेडिसिन और हृदय रोग विभाग में सबसे ज्यादा भीड़ रही। मरीजों को पैथोलॉजी और एक्सरे कक्ष में भी परेशान होना पड़ा। भीड़ अधिक होने के कारण जांच के लिए इंतजार करना पड़ा।