रायबरेली। राजनीति विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान ने सोमवार को जिले के किसान आंदोलन एवं मुंशीगंज गोलीकांड पर लिखी पुस्तकों पर परिचर्चा आयोजित की। इस दौरान अमर बहादुर सिंह की पुस्तक एक और जलियांवाला, राम सिंह की पुस्तक रायबरेली किसान आंदोलन की यज्ञ भूमि और प्रो. विपिन चंद्रा की पुस्तक प्लीजेंट इन रिवॉल्ट पर चर्चा की गई।
फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. राम बहादुर वर्मा ने कहा कि नई पीढ़ी को अवध के किसान आंदोलन और 6 जनवरी 1921 को हुए फुरसतगंज गोलीकांड एवं 7 जनवरी 1921 को हुए मुंशीगंज गोलीकांड की सच्चाई जानने के लिए इन पुस्तकों को पढ़ना चाहिए, जिससे वे अपने पूर्वजों के साहस और संघर्ष की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इस किसान आंदोलन के कारण ही रायबरेली स्वाधीनता संग्राम की अगली कतार में आ गया और पूरे देश को संघर्ष का रास्ता दिखाया।
महामंत्री डॉ. बृजकिशोर ने कहा कि किसान आंदोलन में किसानों की क्रांतिकारी भूमिका के कारण ही यह जिला स्वाधीनता संग्राम का गढ़ बना और 1930-31 का नमक सत्याग्रह उत्तर प्रदेश में रायबरेली से ही शुरू हुआ। स्कूल-कॉलेजों में किसान आंदोलन के जुझारू नायकों बाबा रामचंद्र, अनमोल शर्मा, पं. जानकी प्रसाद, मुंशी कालिका प्रसाद आदि के बारे में बताया जाना चाहिए, जिससे छात्र-छात्राएं उनके त्याग और संघर्षों से शिक्षा ले सकें। इस मौके पर डॉ. मनोज चौधरी, शरद चौधरी, शैलेश प्रकाश, रामनरेश वर्मा, प्रभात सिंह, रामसजीवन यादव आदि उपस्थित रहे।