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बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता में भूख-प्यास से बेहाल हुए बच्चे

Tue, 02 Feb 2016 12:16 AM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
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राजकीय इंटर कॉलेज के द्वितीय मैदान में सोमवार को बिना किसी तैयारियों के बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता एवं शैक्षिक समारोह हुआ। इसमें प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के करीब 600 बच्चों ने उत्साह के साथ भाग लिया। करीब ढाई घंटे देर से कार्यक्रम की शुरूआत हुई।
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जिससे छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। जमीन पर ही बैठकर बच्चों को समय बिताना पड़ा। वहीं भूख और प्यास ने भी उन्हें बेहाल कर दिया। इन अव्यवस्थाओं के बावजूद बच्चों का उत्साह देखने लायक था। पुरस्कार मिले तो उनके चेहरे खिल उठे।

सुबह नौ बजे कार्यक्रम की शुरूआत होनी थी। नगर क्षेत्र के विभिन्न प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के टीचर छात्र-छात्राओं को लेकर पहुंच गए। कार्यक्रम को शुरू होने में करीब ढाई घंटे लग गए। मैदान में दरी भी न बिछी होने से नन्हें-मुन्नों को यह समय जमीन पर बैठकर बिताना पड़ा।
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करीब 11:30 बजे नगर क्षेत्र की खंड शिक्षा अधिकारी शशि प्रभा पांडेय ने गुब्बारा उड़ा कर प्रतियोगिताओं की शुरुआत की। इसके बाद प्रतियोगिताओं का दौर शुरू हुआ। खो-खो, लंबी कूद, कबड्डी, चक्का फेंक, समूह गान आदि प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं ने पूरे जोश के साथ भाग लिया।

शाम चार बजे तक कार्यक्रम चला। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए बच्चों के लिए भोजन की भी उचित व्यवस्था नहीं थी। चंद छात्र-छात्राओं को ही खाना नसीब हो सका। जो बच्चे घर से खाना लेकर आए थे उन्होंने तो पेट की आग बुझा ली, लेकिन अन्य बच्चों को भूख ने बेहाल कर दिया।

पेयजल के लिए भी उन्हें तरसना पड़ा। हालांकि बाद में नगर पालिका परिषद से टैंकर मंगाकर पानी उपलब्ध कराया गया। यही नहीं मैदान के ऊबड़ खाबड़ होने की वजह से कई प्रतियोगिताएं नहीं हो सकी। बच्चे कहीं गिर कर चुटहिल न हो जाएं, इसलिए 200, 400 और 600 मीटर की दौड़ प्रतियोगिताओं को रद्द करा दिया गया।

कार्यक्रम की समाप्ति पर नगर पालिका अध्यक्ष मो. इलियास ने विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया। समारोह का संचालन लक्ष्मीकांत शुक्ल ने किया। इस मौके पर श्याम नारायण यादव, पंकज द्विवेदी, आशीष तिवारी, मो. शोएब हसन खां आदि मौजूद रहे।

बीईओ नगर शशि प्रभा पांडेय ने बताया कि कार्यक्रम कराने का आदेश अचानक आ गया। इसके चलते तैयारियां करने का समय नहीं मिला। आनन-फानन समारोह कराना पड़ा। शासन की ओर से आयोजन के लिए लगभग पांच हजार रुपये आवंटित किए गए हैं।
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वहीं बच्चों को देने के लिए सिर्फ पुरस्कार ही 3600 रुपये के मिले। ऐसे में बजट की कमी भी आयोजन को भव्य बनाने में बाधक बनी।
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