रायबरेली। जगतपुर थाना क्षेत्र में रविवार रात सीएचसी अधीक्षक और स्टाफ के अन्य कर्मियों की प्रताड़ना से तंग आकर एक फार्मासिस्ट ने फांसी लगाकर जान दे दी। सुबह उसका शव सरकारी आवास में छत से लटकता पाए जाने से सनसनी मच गई। पिता ने सीएचसी अधीक्षक और स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी पर बेटे को परेशान करने का आरोप लगाया और कहा कि इसी वजह से उसने खुदकुशी कर ली है। पिता का कहना है कि उसने तहरीर थाने में दे दी है। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पुलिस का कहना है कि तहरीर मिली है।
लखनऊ के डी-2/401 एलडीए कॉलोनी कानपुर रोड निवासी एवं रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी कंचनलाल का बेटा फार्मासिस्ट डॉ. वीरेंद्र गौतम (46) यहां जगतपुर सीएचसी में तैनात था। तीन महीने पहले ही बदायूं जिले से यहां स्थानांतरण होकर आया था। फार्मासिस्ट यहां पर सरकारी आवास में अकेले रहता था, जबकि उसका परिवार लखनऊ में रहता है। सोमवार की सुबह आवास का दरवाजा नहीं खुला तो आसपास के लोगों ने सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर फोन मिलाया, लेकिन फार्मासिस्ट ने फोन नहीं उठाया। अनहोनी की आशंका से जगतपुर थाने को सूचना दी गई। किसी तरह दरवाजा खोलकर पुलिस आवास के अंदर गई तो छत के कुंडे में रस्सी के सहारे फार्मासिस्ट का शव लटक रहा था। पुलिस ने फौरन शव को नीचे उतारा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सूचना पर पिता परिवार समेत जगतपुर और वहां से पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा। पिता का आरोप है कि सीएचसी अधीक्षक डॉ. मनोज शुक्ला और स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी समेत अन्य कर्मचारियों की प्रताड़ना की वजह से बेटे ने फांसी लगाकर जान दे दी है। पिता का आरोप है कि उसके बेटे से 12-13 घंटे ड्यूटी ली जाती थी। छुट्टी भी नहीं दी जाती थी। इससे बेटा परेशान था। दिवाली पर एक दिन की छुट्टी दी थी। दूसरे दिन बुला लिया था। इतना ही नहीं एक अन्य फार्मासिस्ट का चार्ज भी उसके बेटे डॉ. वीरेंद्र गौतम को ही दे दिया गया था, जो लंबे समय से अवकाश पर चल रहा है। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी ने स्टोर रूम से कोई सामान निकाल लिया था। सामान गायब होने पर उसके बेटे को फंसाने की धमकी दी जाती थी। इसी प्रताड़ना से तंग आकर बेटे ने ऐसा कदम उठाया। पिता का कहना है कि बहू कमला देवी की ओर से थाने में तहरीर दिलाई गई है। कार्यवाहक थानेदार सौरभ शुक्ला ने बताया कि सीएचसी अधीक्षक की प्रताड़ना से तंग आकर डॉ. वीरेंद्र गौतम के फांसी लगाए जाने की तहरीर थाने में दी गई, जिसमें तीन माह से वेतन न मिलने की बात भी कही गई है। विभागीय अधिकारियों के समझाने पर परिवारीजनों ने तहरीर वापस ले ली है। फार्मासिस्ट ने फांसी लगाकर जान दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की सही वजह सामने आ जाएगी।