रायबरेली। जिले के 55 गांवों में अवैध शराब का कारोबार कुटीर उद्योग बन गया है। इसके अलावा 200 और गांवों में चोरी छिपे पुलिस की मदद से शराब की भट्ठियां धधक रही हैं। इस कारोबार को रोकने के लिए आज तक कठोर कदम नहीं उठाए गए। आबकारी और पुलिस विभाग ने छापेमारी करके औपचारिकता जरूर निभाई। पांच महीने में शराब बनाने के 914 आरोपियों को आबकारी पुलिस ने पकड़ा है। इसमें करीब 450 महिलाएं शामिल हैं। यह कारोबार जिले में खूब फलफूल रहा है। खास बात यह कि शराब बनाने के धंधे में लिप्त लोग दबंग है, इसलिए इनका विरोध भी गांव के लोग नहीं कर पाते हैं। चार साल पहले कोड़रस में पांच लोगों की जहरीली शराब पीने से मौत हो चुकी है। इसके अलावा कई और घटनाएं होने के बाद भी न तो पुलिस और न ही आबकारी विभाग गंभीर है। बहराइच में शराब बनाने का विरोध करने पर एक महिला की हत्या कर शव पेड़ पर लटका दिया गया। जिले में भी शराब बनाने का कारोबार वर्षों से चल रहा है, लेकिन इसके खिलाफ कोई भी आवाज नहीं उठाता है। पुलिस व आबकारी विभाग की मिलीभगत होने से आम आदमी विरोध करने से कतरा रहे हैं। इस कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए आबकारी विभाग ने पांच महीने में चार हजार छापे मारे। इस दौरान 914 कारोबारियों को पकड़कर उनके खिलाफ केस दर्ज किए। करीब दस हजार लीटर शराब भी बरामद की। कार्रवाई के बाद भी यह कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है।
इनसेट
10 थाना क्षेत्रों के ये बदनाम गांव
कोतवाली क्षेत्र के बिबियापुर, अहियारायपुर, भदोखर क्षेत्र के भुएमऊ, रजवापुर, गढ़ी मुतवल्ली, माखा का पुरवा, हरबंशखेड़ा, कल्याणपुर रैली, मिलएरिया क्षेत्र के सिद्धा का पुरवा, मक्कू का पुरवा, मालिन का पुरवा, खसपरी, उफरामऊ, हरचंदपुर क्षेत्र के रहवां, पारा, मझिगंवाराव, नयापुरवा, हरचंदपुर, गुरुबख्शगंज क्षेत्र के घाटमपुर, आशाराम का पुरवा, गोझरी, कोरिहर, चिलौला, गंभीरपुर, सोमबंशीपुर, सराय डिगोसा, बरउवा, बढ़इन, सरैया, बछरावां क्षेत्र के पासीटूसी, उफरामऊ, भुलेंडी, बख्तावरखेड़ा, भवरेश्वर, शिवगढ़ क्षेत्र के बोधीखेड़ा, नया पुरवा, सर्वजीत पुरवा, खीरों क्षेत्र के मोहनपुरा, मुस्तकीमगंज, बेहटा सातनपुर, कलुआ खेड़ा, पृथ्वीखेड़ा, महरानीगंज, सेमरी कछुवारा, लालगंज क्षेत्र के नंदाखेड़ा, गुलाब पुरवा, भिखियापुरवा, सरेनी क्षेत्र के बैरुवा रामपुर, गोबरेपुर, ऊंचाहार क्षेत्र के नयापुरवा भीटा, अरखा, भटेहरी, नरवापार व गुलरिहा आदि शराब बनाने के लिए बदनाम हैं। इसके अलावा करीब डेढ़ सौ और गांवों में भी शराब बनती है।
कोट
अवैध शराब के कारोबार को रोकने के लिए थानेदारों को कडे़ निर्देश दिए गए हैं। क्षेत्रों में शराब पीने से घटना होने की जिम्मेदारी भी थानेदारों की ही तय की गई है। समय-समय पर अभियान चलाकर कारोबारियों को पकड़ा जा रहा है।
राजेश कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक