रायबरेली (ब्यूरो)। नाबालिग का अपहरण व दुराचार में सहयोग देने वाले चार अभियुक्तों को कोर्ट ने दोषसिद्ध कर सजा सुनाई है। यह फैसला सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश जनार्दन सिंह ने सुनाया।
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले एडीजीसी गिरिजेश कुमार सिंह के मुताबिक, मामले की रिपोर्ट थाना भदोखर में पीड़िता के पिता रामकुमार (परिवर्तित नाम) ने सात फरवरी 2006 को दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार उसकी बेटी तीन फरवरी 06 को खेत जा रही थी। रास्ते में उसे गांव की किशना देवी, फूलन देवी और रामा देवी ने गन्ना काटने के बहाने बुलाया, तभी गांव के बाबू व रामरतन भी आ गए। इसके बाद बाबू व रामरतन ने लड़की को धमकी देकर दिनेश कुमार के घर ले गए और वहां दो दिन तक बंधक बनाए रखा। यहां आरोपी बाबू ने उसके साथ दुराचार किया। इस काम में महिलाओं के साथ दिनेश ने भी सहयोग किया। पुलिस ने विवेचना के बाद रामरतन, फूलन देवी, रामा देवी, बाबू व दिनेश कुमार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जबकि किशना देवी को चार्जशीट से बाहर कर दिया गया। मुख्य आरोपी बाबू के किशोर होने के कारण उसकी पत्रावली ट्रायल के लिए किशोर न्याय बोर्ड भेजी गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद बाकी के चार अभियुक्तों को सजा सुनाई। इसमें रामरतन को 10 वर्ष, अभियुक्त फूलन देवी व रामा देवी को पांच-पांच वर्ष और दिनेश को 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।