रायबरेली। न्यायालयों में बढ़ते बोझ और वादकारियों की मुश्किलों को कम करने के लिए अब ग्राम न्यायालयों का गठन किया जाएगा। इसको लेकर प्रशासनिक स्तर पर पहल भी शुरू कर दी गई है। ऐसा हो जाने पर वादकारियों को न्याय पाने के लिए जिला मुख्यालय की भागदौड़ से छुटकारा मिल सकेगा।
केंद्र सरकार की पहल पर तहसील स्तर पर ग्राम न्यायालय की स्थापना करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए भूमि, भवन, आवास आदि की व्यवस्था के लिए प्रशासन स्तर पर पत्राचार प्रारंभ कर दिया गया है। ग्राम न्यायालयों के खोलने का मुख्य उद्देश्य दीवानी, कलेक्ट्रेट में लगातार फाइलों की बढ़ती संख्या और वादकारियों को कई-कई वर्ष तक न्याय के इंतजार को खत्म कराना है। इससे वादकारियों को जिला मुख्यालय तक वाद के सिलसिले में आने-जाने में होने वाले आर्थिक नुकसान से भी निजात मिल सकेगी। ग्राम न्यायालय में नाली, खड़ंजा, संपत्ति समेत छोटे आपराधिक मामलों का निस्तारण किए जाने की भी योजना है। यदि सब कुछ ठीकठाक रहा तो अगले वित्तीय वर्ष में तहसील स्तर पर ग्राम न्यायालय की स्थापना हो जाएगी। तहसील स्तर पर खुलने वाले ग्राम न्यायालय का लाभ इस जिले के न्यायिक क्षेत्राधिकार वाले सात तहसीलों को मिलेगा। रायबरेली जिले में लालगंज, महराजगंज, डलमऊ, ऊंचाहार व सदर तहसील और अमेठी जिले के तिलोई, सलोन में ग्राम न्यायालय खोलने की योजना है। अमेठी जिले की सलोन और तिलोई तहसीलों का न्यायिक क्षेत्र अभी भी रायबरेली के जिला एवं सत्र न्यायालय को ही है।