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जैसा मन में विचार किया जाए, वैसा ही दूसरों से कहा जाए

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मन, वचन, कार्य की सरल प्रवृत्ति का नाम ही आर्जव
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रायबरेली। सिविल लाइंस स्थित दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पर्युषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव की पूजा अर्चना के लिए सोमवार सुबह से ही भक्तों का जमावड़ा लगा रहा। पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ, जो देर शाम तक सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के साथ समाप्त हुआ।
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आरके जैन ने कहा कि जैसा अपने मन में विचार किया जाए, वैसा ही दूसरों से कहा जाए और वैसा ही कार्य किया जाए। इस प्रकार से मन, वचन, कार्य की सरल प्रवृत्ति का नाम ही आर्जव है। उन्होंने कहा कि हम बनावटी जीवन जीते हैं। सरलता से हम जीना नहीं चाहते। हम जो हैं, वह नहीं, कुछ और दिखाना चाहते हैं। ऐसे में जो हम हैं वह जी नहीं पाते और जो दिखना चाहते हैं वैसे बन नहीं पाते। दुविधा में दोनों तरफ से हाथ गंवा बैठते हैं। मीडिया प्रभारी अंकित जैन ने बताया कि सुबह पूजा-अर्चना के बाद शाम को सामूहिक आरती व धर्म पर आधारित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इसमें बच्चे, महिलाएं बुजुर्ग बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। इस मौके पर वैभव जैन, नितेश जैन, नितिन जैन, विकास जैन, रमेश जैन, सनी जैन, अनुराधा, अनीता, नीरू, इंदु आदि मौजूद रहे।
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