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बहुत मजबूर हो जाता है बूढ़ा बाप भी थक कर

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रायबरेली। अल्फा साहित्य संगम की ओर से सलोन के अल्फा कॉन्वेंट स्कूल में आयोजित कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में साहित्यकारों ने अपनी समसामयिक रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम में नामचीन शायरों और कवियों के साथ ही स्कूल के छात्र-छात्राओं ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इन सभी को सम्मान से नवाजा गया।
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मुख्य अतिथि मो. अतहर ने कहा कि काव्य हमारे दिलों में रस घोलता है और हर एक को प्रभावित करता है। मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. जावेद खान ने कहा कि मुशायरे और कवि सम्मेलन हमारी तहजीब और संस्कृति की रक्षा करते हैं। प्रधानाचार्य शुएब खान ने कहा कि ऐसे आयोजनों से स्कूल के बच्चों को भी लाभ मिलेगा और वे कुछ सीख सकेंगे।


छात्र-छात्राओं में आसिफा, अल्शिफा, काशिका, अब्दुल्ला, जीनत फातिमा, जैनब फातिमा, अनुष्का सोनी आदि ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। शायर असर सलोनवी ने अपनी रचना पेश करते हुए कहा- तूने कैसे सोच लिया, मैं तेरे काम न आऊंगा। डॉ. शुएब ने कहा - बहुत मजबूर हो जाता है बूढ़ा बाप भी थक कर, नहीं तो अपने बेटों की बुराई कौन करता है।
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शायर आलिम समर ने कहा - किसी खुद्दार की गैरत बआसानी नहीं बिकती, बहुत मजबूर होता है तो गैरतदार बिकता है। मुजाहिद सलोनी, नूर सलोनी, मजीद रहबर, अमजद खान, दिलशाद राही, गीतेश जन्नत, अनुपम शुक्ला, लक्ष्मी नारायण, मो. आजम ने भी काव्यपाठ किया।


अध्यक्षता बृजेश श्रीवास्तव तन्हा और संचालन कासिम हुनर ने किया। इस मौके पर मो. जैदी, मो. तुफैल, मो. नफीस, हाजी चौधरी महफूज, शकील अहमद अंसारी, फैज मुहम्मद, निहाल अहमद अंसारी, डॉ. मुजीब, हाफिज जुबैर आदि मौजूद रहे।
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