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शासन से कार्रवाई की चेतावनी के बाद जागे सीएमओ

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90 झोलाछाप के खिलाफ 12 थानों में दी तहरीर
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रायबरेली। जिले में झोलाछाप की कारगुजारियों के ये तो महज चंद नमूने मात्र हैं। लोग रोज झोलाछाप के गलत इलाज का शिकार हो रहे हैं।

प्रदेश में सपा सरकार के गठन के बाद सीएमओ को झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए गए, लेकिन पांच हजार से अधिक झोलाछाप लोगों की जान के दुश्मन बने हैं।

अब तक एक के खिलाफ भी एफआईआर नहीं की गई। एसीएमओ डॉ. एसके चक के नेतृत्व में बनी टीम ने 90 से अधिक झोलाछाप को पकड़ा, लेकिन कार्रवाई सेटिंग-गेटिंग तक ही सिमट कर रह गई।
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अपना पल्ला झाड़ते हुए सीएमओ ने झोलाछाप के खिलाफ एफआईआर कराने के लिए सूची एसपी को भेज दी थी, लेकिन अब तक एफआईआर नहीं हुई। अब देखना है कि तहरीर मिलने के बाद रिपोर्ट दर्ज होती है या नहीं।

बार-बार निर्देश के बाद भी झोलाछाप पर कार्रवाई न किए जाने पर शासन ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों ने सीएमओ को जमकर फटकार लगाई है।

अपनी कुर्सी को बचाने के लिए सीएमओ ने अब जिले के भदोखर, महराजगंज, डीह, गुरुबख्शगंज, सलोन, सरेनी समेत 12 थानों में 90 झोलाछाप पर एफआईआर के लिए तहरीर भेजी है।
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खास बात यह है कि जिले में पांच हजार से अधिक झोलाछापों की दुकानें सजी हैं, लेकिन सीएमओ शासन के बार-बार आदेश के बाद भी 90 झोलाछाप को ढूंढ पाए हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग के मनमाने अधिकारियों की कार्यशैली की पोल खुल रही है।
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