गंगाघाट पर बनेगा पुल, भूमि अधिग्रहण की मांगी रिपोर्ट
ऊंचाहार (रायबेली)। रायबरेली और फतेहपुर वासियों के लिए एक अच्छी खबर है। दोनों जिलों के बीच की दूरी कम करने के लिए तीर का पुरवा मजरे खरौली गंगाघाट पर पुल बनाने की कवायद शुरू हो गई है।पुल निर्माण के लिए तहसील से भूमि अधिग्रहण की रिपोर्ट मांगी की गई है। यह पुल फतेहपुर जिले के नौबस्ता गंगाघाट को जोड़ेगा। औसतन प्रतिदिन 10 हजार से अधिक लोगों का नाव के सहारे यहां आना जाना रहता है। पुल बनने के बाद उन्हें भी राहत मिलेगी। साथ ही दोनों जिलों के बीच व्यापार करने में आसानी हो जाएगी।
रायबरेली जिले के ऊंचाहार तहसील के तीर का पुरवा मजरे खरौली गंगा घाट है। जहां से जिला फतेहपुर के नौबस्ता गंगाघाट ठीक सामने पड़ता है। हालांकि एक-दूजे गंगाघाटों पर आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप सिंह ने 3 अप्रैल 2017 को अधीक्षण अभियंता सेतु 31वां वृत्त लोक निर्माण विभाग लखनऊ को पत्र लिखकर तीर का पुरवा से नौबस्ता गंगा घाट पर पुल निर्माण के लिए लिखा था।
इसमें पुल निर्माण होने से लखनऊ से इलाहाबाद एनएच मार्ग जिला फतेहपुर नजदीक से जुड़ जाने का जिक्र किया गया था। इसके बाद मामला पुल निर्माण के करीब पहुंचा। फतेहपुर के उप परियोजना प्रबंधक ने ऊंचाहार तहसीलदार को पत्र भेजकर पुल निर्माण में आने वाले भूमि के लिए आख्या मांगी हैं। इसमें भूमि के मूल्यांकन के लिए सर्किल रेट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। ऊंचाहार तहसीलदार अशोक कुमार ने बताया कि पुल निर्माण के लिए प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई है। जो आख्या मांगी गई है, उसके लिए राजस्व की टीम लगा दी गई है। पुल निर्माण में ग्रामीणों की भूमि से लेकर ग्राम समाज की भूमि तक की स्थलीय जांच करने के बाद रिपोर्ट को भेजा जाएगा। वहीं तीर का पुरवा गांव के जयनारायन व कंदरावां गांव के पवन सिंह, गंगौली के राजेंद्र, ग्राम प्रधान होरेसा बंजरंगी, कमल सिंह यादव, गिरधारी यादव, नरेंद्र यादव का कहना है कि पुल बनने से दोनों जिले के लोगों को फायदा मिलेगा। खासकर व्यापार अच्छा होगा। पुल न होने से नाव का सहारा लेना पड़ता है। अब यह समस्या दूर होने जा रही है, जो खुशी की बात है। उनका कहना है कि फतेहपुर में केले और दलहन की खेती अच्छी होती है। कारोबार बढ़ने से दोनों जिलों के लोगों को फायदा मिलेगा।
पीपे के पुल से चलाना पड़ता काम
वैसे तो तीर का पुरवा मजरे खरौली गंगाघाट और फतेहपुर के नौबस्ता गंगाघाट जाने के लिए पीपे का पुल बनाया जाता है, लेकिन इसका लाभ कुछ माह ही मिल पाता है। बरसात के दिनों में गंगा का पानी उफान मारता है। इसलिए पीपे का पुल हटा लिया जाता है। अस्थायी पुल होने से लोगों को नाव का सहारा ही लेना पड़ता है। इससे लोगों को आने जाने में दिक्कत होती है। साथ ही दोनों जिलों के बीच का व्यापार भी नहीं हो पाता। पुल बनने से यह समस्या दूर हो सकेगी।