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कैबिनेट मंत्री बर्खास्त न हुए तो सीएम आवास पर आत्मदाह

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न्याय न मिला तो सीएम आवास पर करेंगे आत्मदाह
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रायबरेली। अप्टा में हुए नरसंहार में मारे गए पांचों लोगों के परिवारीजनों ने सोमवार को प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और उनके बेटे पर तीखा हमला बोला। कहा कि मंत्री और उनका बेटे परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। किसी सदस्य के बाहर निकलने पर उसकी घेराबंदी करा रहे हैं। ऐसे में पीड़ित परिवारों का दुख कम होने के बजाय और बढ़ता जा रहा है। परिवारीजनाें ने स्वामी प्रसाद की मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी के साथ उनके बेटे की धमकी पर अंकुश लगाने की मांग की। कहा कि न्याय नहीं मिला तो सभी पीड़ित परिवार बच्चों के साथ सीएम आवास कालीदास मार्ग पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह कर लेंगे।
ऊंचाहार थाना क्षेत्र के अप्टा मजरे इटौरा बुजुर्ग गांव में 26 जून को हुए नरसंहार के बाद पहली बार सोमवार को पीड़ित परिवारों में मुकदमे के वादी और पूर्व प्रधान रोहित शुक्ला के भाई देवेश शुक्ला, मृतक रोहित की पत्नी कुसुम शुक्ला, बहन पूनम देवी, अनूप की पत्नी शिखा मिश्रा, मां राजकुमारी, अंकुश मिश्रा की पत्नी पूजा के अलावा कौशिल्या देवी, जगरानी देवी आदि परिवारीजन मीडिया से मुखातिब हुए। पत्रकारों से बात करते हुए कई महिलाओं की आंखें नम हो गईं। देवेश शुक्ला, कुसुम शुक्ला, पूनम देवी ने कहा कि पांच लोगों की हत्या कर दी गई और आरोपी पक्ष धरना-प्रदर्शन कर सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। सीबीआई जांच की मांग सिर्फ इसलिए हो रही है, ताकि मामले को लटकाने के साथ आरोपियों को बचाया जा सके।
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उन्होंने साफ कहा कि इस मामले में जब तक कैबिनेट मंत्री का दबाव कम नहीं होगा, तब तक निष्पक्ष विवेचना नहीं हो सकती है। जब मंत्री और उनके बेटे मारे गए लोगों के परिवारों को धमका रहे हैं तो जाहिर है कि उनके दबाव में पुलिस भी काम कर रही है। कैबिनेट मंत्री को बर्खास्त किया जाए, तभी निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई हो सकेगी। उन्हाेंने कहा कि यदि मंत्री को बर्खास्त नहीं किया गया, परिवार को न्याय नहीं मिला, तो लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास कालीदास मार्ग पर अनशन शुरू करने के साथ आत्मदाह किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ कथित सपा नेता मामले को जातीय रंग देने के साथ सीबीआई जांच की मांग करके आरोपियों को बचाने की साजिश कर रहे हैं। योगी सरकार के सहयोग के सवाल पर पीड़ित परिवारों ने कहा कि अब तक हर तरह से सहयोग मिला, लेकिन कैबिनेट मंत्री सत्ता में दबाव बनाकर विवेचना को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
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