रायबरेली। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल बनाना अब चुनौती है। वजह यह कि स्थानांतरण, समायोजन, भर्ती प्रक्रिया समेत तमाम विभागीय कामकाज और बारिश के चलते विद्यालयों में शैक्षिक माहौल बिगड़ा हुआ है।
अब ज्यादातर प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और शिक्षकों की कमी भी पूरी हो चुकी है तो सबसे ज्यादा जोर विद्यालयों में शैक्षिक वातावरण बनाने पर रहेगी।
इसलिए अब कोई बहाना नहीं चलेगा, बल्कि हर हाल में पढ़ाई का माहौल बनाना होगा। जिले के लगभग 2800 परिषदीय विद्यालयों में तकरीबन 2.42 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं, जहां अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र चालू हुआ।
ग्रीष्मावकाश के पहले तक स्कूल चलो अभियान और नामांकन पर जोर रहा। ग्रीष्मावकाश के बाद अंतरजनपदीय स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें यहां से 76 शिक्षक दूसरे जिले चले गए तो गैरजनपदों से 281 शिक्षक यहां पर आए थे। इसके बाद समायोजन की प्रक्रिया चली और अब सहायक अध्यापकों की भर्ती के अंतर्गत 546 नए शिक्षक इस जिले को मिले।
इन सारी प्रक्रियाओं के बीच उलझे अधिकारी भी निरीक्षण के नाम पर खानापूरी करते रहे। दूसरी तरफ पाठ्य पुस्तकें भी पूरी नहीं मिल पाई थीं।
अब नए शिक्षकों के मिल जाने से जहां ज्यादातर स्कूलों में अध्यापकों की कमी पूरी हो चुकी है, वहीं पाठ्य पुस्तकें भी सभी स्कूलों में पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।
ऐसे में स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल बनाना अब चुनौती होगा। यह भी दावा किया जा रहा है कि अब कोई भी विद्यालय शिक्षक विहीन या शिक्षामित्र के भरोसे नहीं रह गया है।
हर स्कूल में शिक्षकों की तैनाती हो चुकी है। बंद या एकल की स्थिति कहीं नहीं है। सभी स्कूलों में पढ़ाई का बेहतर माहौल बने, शिक्षकों और बच्चों की उपस्थिति बनी रहे, इसके लिए सभी खंड शिक्षा अधिकारी निरीक्षण करेंगे। वह स्वयं भी निरीक्षण करके शैक्षिक माहौल का जायजा लेते रहेंगे।
-पीएन सिंह, बीएसए