रायबरेली। मॉडर्न कोच कारखाने ने अपने यहां बनाया गया पहला स्मार्ट कोच उत्तर रेलवे को दे दिया है। इसका ट्रायल कैफियात एक्सप्रेस से शुरू होने जा रहा है।
इस कोच में हवाई जहाज के ब्लैक बॉक्स की तर्ज पर एक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिस्टम लगाया गया है। जानकार इसे ‘ट्रेन विद ए ब्रेन’ कहने में गुरेज नहीं कर रहे हैं।
यात्रियों को कोच में लगाए गए डिस्प्ले से पता चल सकेगा कि अब कौन सा स्टेशन आने वाला है। इस सिस्टम के जुड़ने के बाद अब इन डिब्बों में यात्री सुविधाएं और सुरक्षा विश्वस्तरीय की जाएंगी।
कोच के भीतर की हवा में प्रदूषण के स्तर और एसी की स्थिति की भी जानकारी होगी। कोच के दरवाजों पर लगाए गए हाई रिजोल्यूशन नाइट विजन सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी इस बॉक्स में रिकॉर्ड होगी।
कोच में लगे फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम से आग लगने की सूचना भी तत्काल मिल सकेगी। चलती गाड़ी के पहियों में लगी आठ बियरिंग की कंडीशन पर भी ये सिस्टम नजर रखेगा।
इसके अलावा बोगी में लगाए स्प्रिंग व अन्य पुर्जों पर भी सेंसर नजर रखेंगे। किसी भी खराबी के पहले ही ये सिस्टम को सचेत कर देगा। ये पहियों में लगाए गए सेंसर से संभव होगा।
माना जा रहा है कि इस सिस्टम के जुड़ने से रेल डिब्बों में यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं और सुरक्षा विश्व स्तर की हो जाएंगी। इन कोचों में सफर करने वाले यात्रियों को बेहतर मोबाइल नेटवर्क देने के लिए एक एंटीना भी लगाया गया है।
कोच के वाटर टैंक में पानी का स्तर बताने के लिए भी डिस्पले है। पानी कम होने पर अगले स्टेशन के लिए सिस्टम अपने आप ही अलर्ट जारी कर देगा। जिससे वहां पहुंचने पर कोच में पानी का बंदोबस्त कर दिया जाएगा।
कोच कारखाने की कोशिश है कि डिब्बों में लगाए गए सिस्टम से जल्द से जल्द से डाटा इनपुट मिलने लगे, जिससे इस पूरी टेक्नोलॉजी को और बेहतर बनाया जा सके। फिलहाल एक कोच को स्मार्ट बनाने में करीब 15 लाख रुपये खर्च आएगा।
कारखाने के जीएम राजेश अग्रवाल ने बताया कि, फिलहाल एक कोच उत्तर रेलवे को दिया गया है। जो कैफियात एक्सप्रेस में लगाकर ट्रायल पर रखा जाएगा। इसके बाद रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने 100 कोच बनाने की मंजूरी दी है। जो बनाकर शीघ्र रेलवे को सौंप दिए जाएंगे।
कोच की ये हैं खास बातें...
कंडीशन मॉनिटरिंग
एअर क्वालिटी डिटेक्शन
सीसीटीवी मॉनिटरिंग
पैसेंजर इनफॉरमेशन सिस्टम
फायर डिटेक्शन सिस्टम