सऊदी अरब में हुए विभिन्न करों में बढ़ोतरी की आंच से जिला भी अछूता नहीं रहा। कमाई के लिए यहां से गए 50 से अधिक कामगार वहां बेरोजगारी के हालात में इधर-उधर भटक रहे हैं। यहां तक कि कंपनियों से निकाले जाने के बाद उनके पास स्वदेश लौटने के रुपये तक नहीं हैं।
परिवारीजनों को अपनों की याद सता रही है। घर का माहौल भी गमगीन है। हर कोई अपनों की सकुशल वापसी के लिए दुआ कर रहा है। पुलिस विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले के करीब एक हजार लोगों ने पासपोर्ट बनवा रखा है। हालांकि इसमें यह तय नहीं है कि कितने लोग सऊदी अरब गए हुए हैं।
पर विभाग के अफसरों का मानना है कि कमाई के लिए 50 से अधिक लोग सऊदी अरब गए हुए हैं। इसमें ऊंचाहार, अमावां, सलोन, परशदेपुर, बछरावां और शहर के लोग शामिल हैं। इस बीच करों में बढ़ोतरी के चलते सऊदी अरब में कई कंपनियां बंद होने के कगार पर हैं।
कई कंपनियों ने खुद को चलाए रखने के लिए कामगारों की छंटनी भी शुरू कर दी है। इससे ये लोग वहां बेरोजगार हो गए हैं। उनके सामने जीवन यापन का संकट पैदा हो गया है। रुपयों की कमी के चलते ये लोग भुखमरी के शिकार हैं। इनमें जिले के भी 50 से अधिक लोग शामिल हैं।
परशदेपुर क्षेत्र के पूरे बाकरशेख गांव निवासी मो. रईश के दो लड़के मो. तसलीम और मो. तनवीर रोजगार के चक्कर में एक साल पहले सऊदी अरब गए थे। इसमें से एक बेटे मो. तनवीर को नौकरी से निकाल दिया गया है। बड़ा भाई किसी तरह रोजी-रोटी का इंतजाम कर रहा है।
पिता और मां रेशमाबानो का कहना है कि बेटों से बातचीत हुई थी। उन्होंने बताया था कि जब सऊदी अरब पहुंचे थे तो कुछ माह तो ठीकठाक रहा, लेकिन अब यहां के हालात ठीक नहीं है। कंपनियां कामगारों की छंटनी कर रही हैं। इस पर परिवारीजन बेटों की सकुशल वापसी के लिए दुआ मांग रहे हैं।
उधर, सलोन तहसील क्षेत्र के सेधियापुर निवासी रईश और वसीम भी सऊदी अरब गए हुए हैं। परिवारीजनों का कहना है कि वो बता रहे थे कि यही हालात रहे तो रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। इसी तरह अन्य कस्बों के लोग भी वहां बेरोजगार हो गए हैं।
एसपी विनय यादव का कहना है कि विदेश जाने के लिए पासपोर्ट तो अधिक लोग बनवाते हैं, लेकिन जिले से कितने लोग सऊदी अरब गए हुए हैं, यह कोई जानकारी नहीं है। वहां फंसे लोगों की जानकारी अभी ऊपर से अभी तक नहीं आई है। स्थानीय जानकारी के अनुसार कई लोग हैं।